एक शोध में कहा गया है कि भारत 15 उच्च जोखिम वाले देशों में से एक है, जहां लॉकडाउन के नियमों में ढील देने से नया सं’क्रमण फैल सकता है। इससे ऐसी स्थिति पैदा हो जाएगी जिससे कड़े प्रतिबंधों को फिर से लागू किया जाएगा। यह विश्लेषण सिक्योरिटीज रिसर्च फर्म नोमुरा ने किया है।
इस विश्लेषण में 45 मुख्य अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारे विजुअल टूल से मिश्रित परिणाम प्राप्त हुए हैं। 17 देश की अर्थव्यवस्थाएं ट्रैक पर हैं और उनमें वायरस की दूसरी लहर का कोई संकेत नहीं है। 13 देशों में अस्थायी चेतावनी संकेत दिखाई दिए हैं और 15 देश उच्च जोखिम में हैं। यहां वा’यरस की दूसरी लहर आ सकती है।’

विश्लेषण के अनुसार लॉकडाउन हटाने से दो संभावित परिदृश्य बनेंगे। पहले अच्छे परिदृश्य में कोई देश या अमेरिकी राज्य के लोगों की गतिविधियों में त्वरित सुधार का अनुभव होगा। लॉकडाउन के नियमों में काफी ढील दी गई है और व्यापार फिर से शुरू हो गए हैं। यहां रोजाना नए मामलों में मामूली बढ़ोतरी होगी जिससे लोग ज्यादा से ज्यादा गतिविधियां कर सकेंगे।
वहीं, दूसरी तरफ बुरा परिदृश्य है। इसमें अर्थव्यवस्था को खोलने से रोजाना सं’क्रमितों के मामले बढ़ेंगे। जनता के बीच ड’र फैलेगा और लोगों की गतिविधियां प्रभावित होंगी। यहां लॉकडाउन को दोबारा लागू किया जा सकता है। विश्लेषण में 45 देशों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। पहली श्रेणी ऑन ट्रैक, दूसरी चेतावनी संकेत और तीसरी उच्च जोखिम वाली है।

भारत जो;खिम श्रेणी में आता है। इसके अलावा इस श्रेणी में इंडोनेशिया, चिली, पाकिस्तान और कई अन्य निम्न-से-मध्यम आय वाले देश शामिल हैं। इस समूह में कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाएं जैसे कि स्वीडन, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका और कनाडा भी शामिल हैं। ऑन ट्रैक में फ्रांस, इटली और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। वहीं जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन चेतावनी संकेत वाली श्रेणी में हैं।
Input : अमर उजाला