मंत्री मदन सहनी के गुस्से में दिखने लगा दम, अब कुशवाहा ने भी माना- ‘बिहार में अफसरशाही से लोग नाराज’

अभी आप भूले नहीं होंगे बिहार में अफसरशाही विवाद को. पिछले पखवारे ही समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने अफसरशाही के खिलाफ अपने पद से इस्तीफा देने की धमकी तक दे डाली थी. इस पर मंत्रियों के बीच खेमेबाजी भी हो गई थी. लेकिन बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर मामला सलटा. लेकिन अब मंत्री मदन सहनी के गुस्से में दम दिखने लगा है. जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी माना कि बिहार में अफसरशाही से जनता त्रस्त है. लोगों में उसके प्रति नाराजगी है.

दरअसल, जेडीयू के वरीय नेता व संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पिछले 10 जुलाई से बिहार यात्रा पर हैं. वे लोगों से जनता का फीडबैक ले रहे हैं. उन्होंने अपनी यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू की है. वे अब तक आधा दर्जन जिलों में जा चुके हैं. उनका जगह-जगह जबर्दस्त स्वागत हो रहा है. इस दौरान लोगों ने उनसे अफसरों को लेकर शिकायतें की हैं.

उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू की कार्यशैली से लेकर सरकारी सिस्टम तक पर लोगों से बातचीत की. इस दौरान लोगों ने बताया कि सरकारी सिस्टम को थोड़ा और दुरुस्त करने की जरूरत है. कुशवाहा ने स्वीकार किया कि बिहार में अफसरशाही हावी है. अफसरशाही को लेकर लोगों में काफी नाराजगी है. लोगों ने यह भी कहा कि अफसरों के रवैये को बदलने की जरूरत है. हालांकि, कुशवाहा ने यह भी माना कि लोगों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति कोई नाराजगी नहीं है.

गौरतलब है कि पिछले पखवारे में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने अपने प्रधान सचिव अतुल प्रसाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइल लटक गई थी. इससे गुस्से में आए मंत्री मदन सहनी ने अपने पद से इस्तीफा देने तक की धमकी दे डाली थी. उन्होंनें मीडिया के सामने ही साफ शब्दों में कह दिया था कि हम केवल पटना में सरकारी आवास और गाड़ी के लिए मंत्री नहीं बने हैं. अफसर कोई काम ही नहीं होने देता है. इसे लेकर वे तीन दिनों तक मुंह फुलाए दिल्ली में बैठे रहे. बाद में पटना लौटे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात हुई. मामला सलट गया.

लेकिन मंत्री मदन सहनी के आरोप के बाद मंत्रियों के बीच भी खींचतान शुरू हो गई. मंत्री नीरज कुमार बबलू, मंत्री रामप्रीत पासवान समेत कई अन्य ने मदन सहनी के आरोप को सही ठहराया. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने तो यहां तक कह दिया कि मंत्री-विधायक की बात अधिकारी सुनते ही नहीं हैं. दूसरी ओर, मंत्री जीवेश मिश्रा ने मदन सहनी के आरोप को गलत बताया. कहा कि तालमेल कर काम को निकाला जाता है. इसी तरह, मंत्री संतोष मांझी ने भी कहा कि मुझे अफसरशाही से कोई प्रॉब्लम नहीं है. मंत्री जीवेश मिश्रा की बात पर मदन सहनी ने जबर्दस्त पलटवार किया कि आपकी तरह हम तालमेल करना नहीं सीखे हैं. आपको दो विभाग मिला है इसलिए खुश हैं. बहरहाल, एक बार फिर अफसरशाही का मुद्दा सामने आया है. अब उपेंद्र कुशवाहा ने भी माना कि बिहार में अफसरशाही हावी है और इसे लेकर जनता में नाराजगी है.

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