मुजफ्फरपुर। महानायक राजकपूर का मुजफ्फरपुर से गहरा नाता रहा है। उनका महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री के निराला निकेतन पर आना-जाना रहा है।

अब हमारे बीच महानायक और महाकवि नहीं है, मगर दोनों की यादें अभी भी यहां के लोगों की जुबान पर है।
राजकपूर के जयंती पर उनको याद करते हुए साहित्यकार डॉ. संजय पंकज भावुक हो जाते है। उनका कहना है कि राजकपूर छात्र जीवन से ही महाकवि शास्त्री के साथ रहे। कई किताब की समीक्षा की और जीवन के अंत तक उनके साथ रहे।
हमारे बीच अब वे नहीं है, लेकिन उनकी ओर से बेला पत्रिका निकाला जाता रहा। साहित्यकार डा.संजय पंकज के अनुसार आज और कल एक फिल्म आई थी। इसमें पृथ्वीराज कपूर, राजकपूर व रंधीर कपूर हैं।
एक दृश्य हैं जिसमें पृथ्वीराज कपूर लेटकर जानकी वल्लभ शास्त्री की पुस्तक निराला के पत्र को रखकर पढ़ रहे हैं। उस परिवार से उस स्तर का जुड़ाव रहा है। कविवर शास्त्री के लिए बकायदा मुंबई में जानकी कुटीर बनाए थे।



