मुजफ्फरपुर : बैंकों के निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन हड़ताल रखकर बैंककर्मियों ने जमकर किया प्रदर्शन

मुजफ्फरपुर। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के निजीकरण एवं बैंकिंग संशोधन बिल 2021 के विरोध में शहर के मिठनपुरा स्थित बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय के समक्ष बैंककर्मियों ने हड़ताल के दूसरे दिन जमकर प्रदर्शन किया।

ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन के राष्ट्रीय सलाहकार और फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया आफिसर्स एसोसिएशन्स के राष्ट्रीय महासचिव सुनील कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर बैंक अधिकारियों का एआईबीओसी एक मात्र संगठन है जिसने राष्ट्र हित में केंद्र सरकार की प्रत्येक नीतियों का क्रियान्वयन ईमानदारी से किया है।

बैंक अधिकारियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़कर राष्ट्र की प्रगति के लिए हर कार्य को निष्ठापूर्वक सम्पादित किया है। इसके बावजूद वर्तमान केंद्र सरकार बैंक कर्मियों की जायज मांगों को अनदेखा कर रही है। उन्होंने दो दिवसीय हड़ताल के मौके पर मिठनपुरा स्थित बैंक ऑफ इंडिया आंचलिक कार्यालय परिसर में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक अधिकारियों के हितों की रक्षा के लिए एआईबीओसी हमेंशा संघर्षरत रहेगा। बैंकों के निजीकरण व बैंकिंग संशोधन बिल 2021 का एआईबीओसी हर स्तर पर विरोध करते हुए सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को निजी हाथों में सौंपने के केंद्र सरकार की नीतियों का भी पूरजोर विरोध करेगा।

एआईबीओसी नेतृत्व ने संसद में पेश किए जाने वाले बैंकिंग संशोधन बिल 2021 के विरोध में अधिकारी-कर्मचारी को जागरूक करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर 30 नवंबर 2021 को जबरदस्त प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी थी।

इसी कड़ी में यूनाइटेड फोरम ने केंद्र सरकार की मनमानी के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन के राष्ट्रीय सलाहकार और फेडरेशन ऑफ बैंक ऑफ इंडिया आफिसर्स एसोसिएशन्स के राष्ट्रीय महासचिव सुनील कुमार ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल मे बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा आम जनता के हित में किए जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि हमारा योगदान किसी से भी कम नहीं है।

उन्होंने तमाम देशवासियों से अपील की है कि बैंककर्मियों के पक्ष में खड़े हो अन्यथा वर्तमान जन विरोधी केंद्र सरकार बैंकिंग व्यवस्था को तहस-नहस कर देगी जो राष्ट्र हित में उचित नही होगा।

वह सभी वैसे काम करेगी जो कि जनता और देश के हित में कहीं से उचित नहीं होगा। देश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी सरकारी बैंको पर निर्भर है और बैंक निजीकरण का सबसे बुरा असर गरीबों, किसानों आदि पर अधिक पड़ने वाला है। कुमार ने बताया कि सरकारी संपत्ति को जल्द बेचने के लिए यह सरकार रोज नई योजनाएं बना रही है।

बैंक, रेलवे, एयरपोर्ट, सरकारी नौकरी, आरक्षण, संविधान, आजादी, देश और भारत का भविष्य आज खतरे में आ चुका है। देश की आर्थिक व्यवस्था पूंजीपतियों के हाथ में जा रहा है।

अगर केंद्र सरकार को सम्पत्तियों को निजी हाथों में सौंपने से रोका नहीं गया तो राष्ट्र की आर्थिक स्थिति चरमरा जायगी। आज केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में बेरोजगारों की अब तक की सबसे बड़ी फौज खड़ी हो गयी है।

एआईबीओसी ने हमेशा राष्ट्र को खड़ा करने में अपना योगदान दिया है और हम बैंक अधिकारी देश की आर्थिक व्यवस्था ठीक रहे, इसे लिए हर कार्य करने को तैयार है। इस मौके पर बैंक ऑफ इंडिया आफिसर्स एसोसिएशन के डॉ. अच्युतानंद, कॉ. जलज सुब्रत को प्रिया, अभिषेक पराशर, रवि उपाध्याय, उप महासचिव जनार्दन प्रसाद यादव आदि अधिकारी काफी संख्या में मौजूद थे।

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