मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर शहर में प्लास्टिक कचरा हवा, पानी और मिट्टी में जहर घोल रहा है। इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ रह है। स्थिति यह है कि प्लास्टिक कचरा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है।
इस पर प्रतिबंध के बावजूद शहर में प्लास्टिक का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। नगर निगम की ओर से कई बर अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक को जब्त कर जुर्माना भी किया गया।
इसके बावजूद इसका उपयोग को रोकने में निगम सफल नहीं हो सका है। पॉलीथिन एवं प्लास्टिक से बने उत्पाद खुले में जलाए जा रहे है। इससे वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है।
नाली और पानी में जाने से खतरनाक केमिकल भी पानी में घुल रहे है। खेतों में जाकर पॉलीथिन खेत की उर्वरा शक्ति को कमजोर कर रही है। वहीं फसलों के उत्पादन पर भी विपरीत प्रभाव डाल रही है।
खाद्य पदार्थो को ले जाने से पॉलीथिन बेकार होने पर उसे फेंक दिय जाता है। यह उपजाऊ भूमि को बंजर बना रहा है। इस तरह से प्लास्टिक हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर रहा है।
यहीं नहीं प्लास्टिक कचरा से निपटारा के लिए नगर निगम के पास समुचित व्यवस्था नहीं है। बताया जाता है कि वैसे तो निगम एक निजी कंपनी की मदद से इसका निष्पादन करता है लेकिन पर्याप्त नहीं है।
हर दिन शहर से दो सौ टन कचरा निकलता है जिसमें 30 से 35 टन प्लास्टिक कचरा होता है। गली-मोहल्ले में बिखरे कचरे या फिर डंपिंग स्थल पर जमा कचरे को जला दिया जाता है।
इससे वायु प्रदूषण महीनों तक रहता है। बिखरे पड़े कचरे के ढेर में पालीथिन की अधिकता होती है। इसमें आग लगा दिया जाता है इससे महीनों तक धुएं के रूप में वातावरण बना रहता है इसके प्रयोग पर रोक लगाने में निगम की लचर कार्यप्रणाली शहरवासियों को नुकसान पहुंचा रही है। नगर प्रबंधक ओम प्रकाश के अनुसार प्लास्टिक कचरा का निष्पादन एक बड़ी चुनौती है। डंपिंग स्थल पर इससे निपटने की जिम्मेवारी एक संस्था को दी गई है। एजेंसी काम कर रही है। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक और पॉलीथिन न जलाने की अपील की।
