मुजफ्फरपुर। शहर के आमगोला स्थित शुभानंदी परिसर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में विवेकानंद और भारत विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम को कवि साहित्यकार डॉ.संजय पंकज ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत मात्र एक देश नहीं है और न ही उसकी आत्मा उसके भूगोल में बसती है। भारत एक परम चैतन्य आत्मा और दर्शन है। विविधताओं में इसका सांस्कृतिक वैभव और एकत्व पूरे संसार में श्रेष्ठ है।
उन्होंने कोरोना सुरक्षा के नियमों के पालन के बीच कहा कि विवेकानंद ने भारत की समस्त दीनता और मनुष्य की हीनत से मुक्ति के द्वार खोलने का जो संकल्प लिया था वह उनकी साधना से सिद्धि तक पहुंच गया।
विवेकानंद को दीनता और पलायन स्वीकार नहीं था। वह निर्भीकता के साथ अपनी बात कहते रहे और मनुष्य के उद्धार और कल्याण में लगे रहे। सारे धर्मों में सदगुगों को देखने और मानने वाले स्वामी जी ने भारतीय सनातन धर्म की जो वैज्ञानिक व्याख्या की वह पूरे विश्व के लिए अलौकिक और प्रेरक है।
युवाओं के सबसे बड़े आदर्श स्वामी विवेकानंद इसलिए है कि वे ज्ञान और विवेक के संतुलन को लेकर लगातार अपने सकारात्मक अभियान में लगे रहे। भारत को जीवंत सत्ता के रूप में देखने वाले स्वामी जी ने मनुष्य को उसकी असीम शक्तियों से अपने शौर्यपूर्ण विचारों से परिचित कराया।
शिकागो के विश्व धर्म संसद में जिस तेजस्वी भारत का उदय हुआ था वह फिर से विश्वगुरु बनने का संकेत दे रहा था। समृद्ध विरासत को लेकर प्रगतिशीलता के साथ स्वामी विवेकानंद वैज्ञानिक चिंतन को प्रतिपादित करते रहे। स्वामी विवेकानंद भारत के आलोक पुरुष थे। उनके व्यक्तित्व के आलोक में हम अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता और असत्य से सत्य की ओर सहज ही अभियान कर सकते है।
विवेकानंद को जानने के लिए केवल एक दिवस ही पर्याप्त नहीं है। सारे शिक्षण संस्थानों तथा सरकारी एवं सामाजिक प्रतिष्ठानों में हर दिन विवेकानंद के विचार और चिंतन का मनन, अध्ययन करते कराते हुए उसे आत्मसात करने की आवश्यकता है।
बिहार गुरु के संस्थापक अध्यक्ष अविनाश तिरंगा उर्फ ऑक्सीजन बाबा ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि विवेकानंद केवल वैचारिक रूप से नहीं बल्कि नैतिक और कर्मशील रूप में भी श्रेष्ठ आदर्श हैं।
कवि नर्मदेश्वर चौधरी ने एक गीत सुनाया। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के प्रयोग के साथ उपस्थित सीमित संख्या में बुद्धिजीवियों का धन्यवाद ज्ञापन चैतन्य चेतन ने किया ।
