मुजफ्फरपुर। समस्तीपुर। बिहार के खास गुलाल से दिल्ली के लोग इस बार गोली मनाएंगे। डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, पूसा में तैयार हर्बल गुलाल उड़ेंगे। अलग-अलग रंगों में बने गुलाल की खादी केंद्र के माध्यम से बिक्री की जा रही है।
अलग-अलग रंगों में बने गुलाल की खादी केंद्र के माध्यम से बिक्री की जा रही है। हाल में खादी भंडार से हुए करार के बाद 15 क्विंटल गुलाल की पहली खेप वहां भेजी गई है। ये गुलाबी, पीला और हरा तीन रंगों में उपलब्ध है।
दिल्ली के चाणक्यपुरी के यशवंत प्लेस स्थित श्री गांधी आश्रम खादी ग्रामोद्योग भवन में रखा गया है। 100 ग्राम के पैकेट की कीमत 30 रुपये है। हर्बल गुलाल तैयार करने के लिए चुकंदर, गेंदा का फूल-पत्ती, सिंदूर का बीज, हल्दी, सेम का पत्ता, गाजर, पालक, कच्ची हल्दी, नीम पत्ता, अरारोट का उपयोग किया जाता है।
लाल रंग का गुलाल बनाने के लिए सबसे पहले चुकंदर का रस निकाला जाता है। उसके बाद फिल्टर कर अरारोट पाउडर में मिलाया जाता है। मिक्सचर मशीन में रोटेट कर अच्छे से मिलाया जाता है। छांव में सुखाकर नमी खत्म की जाती है।
इसके बाद प्लास्टिक पैकेट में पैक किया जाता है। इसी तरह अन्य रंगों के लिए अलग-अलग फूल या फल का इस्तेमाल होता है।
अपशिष्ट प्रबंधन पर उच्च अध्ययन केंद्र की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डा. संगीता देव बताती हैं कि हल्के रंग के लिए प्रति पांच मिलीग्राम रस को 50 ग्राम अरारोट में मिलाते हैं। गाढ़ा रंग के लिए 10 मिलीग्राम रस को 50 ग्राम अरारोट में मिलाया जाता है। कच्ची सामग्री स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाती है।


