मेरे नसीब में शायद ठीक होना नहीं है पापा, इसीलिए मैं जा’न दे रही हूं

भागलपुर के नाथनगर मेरे पिता ने मेरी गंभीर बीमारी के इलाज में काफी पैसे ब’र्बाद कर दिये। मगर मेरे नसीब में शायद ठीक होना ही नहीं, इसलिए मैं जान दे रही हूं। यह लिख कर एक छात्रा ने आ’त्महत्या कर ली।

Suicide rates rise sharply in Tanzania amid economic, social woes

मामला ललमटिया थाना क्षेत्र के छज्जूपुर इलाके में मंगलवार सुबह 11 बजे के करीब का है। छात्रा नेहा (20) टीएनबी कॉलेज की बीएससी पार्ट टू की छात्रा थी। उसने दुपट्टे का फं’दा बना कर छत से लटक कर आ’त्महत्या कर ली।

घ’टना को लेकर नेहा ने बं’द कमरे में घ’टना से पहले एक सु’साइड नोट भी लिखा। इसमें नेहा ने अपने पिता को भगवान का द’र्जा दिया है।

नोट में लिखा है कि पिता जी आपने मेरे इलाज में कभी कोई कमी नही की।  कितने पैसे भी ब’र्बाद कर दिये। लेकिन क्या करें, मेरे नसीब में ही ठीक होना नही लिखा था।

आगे उसने लिखा अब वह इस पी’ड़ा को स’हन नही सकती है।  इसलिए वह सबसे से दूर जा रही है और मौ’त को ग’ले लगा रही है। वही पिता आशुतोष कुमार ने बताया कि उनका पूरा परिवार शिवरात्रि की पूजा करने के लिए मंदिर गया था। ने’हा घर में ही थी।

नीचे कमरे में रह रहे एक युवक ने आकर बताया कि नेहा ने आ’त्महत्या कर ली। अंदर वह अपने दु’पट्टे के बने फं’दे से ल’टक रही थी। उसे इलाज में ले जाने का हमने सोचा।

उसे नीचे उतारा तो उसकी मृ’त्यु हो चुकी थी। पिता ने बताया कि उन्हें चार बेटी व एक बेटा है। बेटी ने आ’त्महत्या कर ली। नेहा का इलाज कोलकाता से चल रहा था।

थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने बताया कि घ’टना में प’रिजनों की लिखित शि’कायत पर यूडी केस दर्ज किया गया है।

श’व का पो’स्टमार्टम करा कर प’रिजनों को सौंप दिया गया है। सु’साइड नोट के मुताबिक यह घ’टना आ’त्महत्या ही प्र’तीत होती है।

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