बिहार : बिहार के लखीसराय का रंग-गुलाल और सिंदूर दूसरे राज्यों में धमाल मचा रहा है। खासकर होली पर्व में रंग-गुलाल की मांग बिहार सहित झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, असम आदि राज्यों में काफी बढ़ जाती है।
पिछले वर्ष कोरोना के कारण रंग-गुलाल का कारोबार काफी प्रभावित रहा। लेकिन, इस बार रंग-गुलाल का कारोबार काफी रंगीन है। लखीसराय शहर की पहचान रंग-गुलाल एवं सिंदूर उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर है। इस उद्योग का इतिहास काफी पुराना रहा है।
वर्ष 1932 में शहर के पुरानी बाजार चितरंजन रोड में पहला रजिस्टर्ड कारखाना चंडी प्रसाद मुरलीधर ड्रोलिया कलर एंड केमिकल्स कंपनी के नाम से शुरू किया गया था।
इसके बाद लखीसराय में चार और रंग-सिंदूर फैक्ट्री खोली गई। बिहार में कुल रजिस्टर्ड 12 रंग सिंदूर फैक्ट्री है जिसमें पांच अकेले लखीसराय में संचालित है। होली पर्व को लेकर इन फैक्ट्रियों में रंग-गुलाल निर्माण का कार्य निरंतर जारी है। प्रत्येक दिन 25 से 30 टन अबीर-गुलाल तैयार किया जा रहा है।
पर्व को लेकर बिहार राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, बंगाल, असम आदि राज्यों में रंग-गुलाल भेजे जा रहे हैं। जानकारी हो कि देश के बंगाल स्थित ख्याति प्राप्त शक्तिपीठ तारापीठ, झारखंड स्थित रजरप्पा और असम स्थित कामाख्या मंदिर में भी लखीसराय में तैयार रंग-गुलाल और सिंदूर की काफी डिमांड रहती है। होली पर्व के बाद सिंदूर निर्माण कार्य शुरू किया जाता है।
