बिहार में होगी वैज्ञानिक खेती, 25 जिलों में 32 हाईटेक मिट्टी लैब , इन जिलों के किसानों की बदलेगी किस्मत ,सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

बिहार : बिहार की सियासत और कृषि नीति में इस साल किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के 25 जिलों में कुल 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है, ताकि कृषकों को उनकी भूमि की मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। यह जानकारी बुधवार को राज्य के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने दी।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की खेती को वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से केन्द्र प्रायोजित मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीन लाख मिट्टी नमूनों के संग्रहण और विश्लेषण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अब तक तीन लाख नमूनों का संग्रहण और 2.98 लाख नमूनों का विश्लेषण पूरा कर लिया गया है, और किसानों को उनके खेतों के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज है। इसके माध्यम से उन्हें अपने खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की सटीक जानकारी मिलती है। जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग की अनुशंसा की जाती है, जिससे अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आती है और उत्पादन अधिक लाभकारी बनता है।

कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना नहीं है,बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों की लागत कम कर उनकी आय में वृद्धि करना भी है।

संतुलित उर्वरक प्रबंधन से भूमि की सेहत सुधरती है, जल संसाधनों का संरक्षण होता है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है। बिहार में अब वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसान सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और टिकाऊ विकास में भी लाभान्वित होंगे।

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