मुजफ्फरपुर। जिले में ग्रामीण कार्य विभाग के सड़कों का बुरा हाल है, लेकिन विभाग कह रहा है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 90 प्रतिशत सड़कों का काम पूरा कर लिया गया है। हकीकत देखना है तो बेला-रोहुआ रोड की सड़क देख लीजिए।
जिले में ग्रामीण कार्य विभाग में अधीक्षण अभियंता से लेकर तीन कार्यपालक अभियंता, एक दर्जन सहायक एवं कनीय अभियंता पदस्थापित हैं। पूछने पर सभी अभियंता सड़क जांच की बात करते हैं, लेकिन सड़कों की वास्तव में क्या स्थिति है इससे अधिकारी अनभिज्ञ हैं।
इमली चौक से बेला-रोहुआ रोड की लंबाई मात्र 0.90 किलोमीटर यानी एक किलोमीटर से भी कम है। अगस्त 2018 में इस सड़क का कार्य प्रारंभ हुआ और एक मार्च 2019 में सड़क पर कालीकरण कर मार्ग का काम पूरा कर लिया गया। छह महीने तक तो सड़क अच्छी रही, लेकिन बारिश शुरू होते ही जर्जर हो गई।
इस बीच ईंट-मिट्टी का मिश्रण डाल सड़क के गड्ढे को भर दिया गया। उसके बाद उस सड़क का हाल और बुरा हो गया। बगल में बेला इंडस्ट्रियल एरिया होने के चलते इस सड़क पर ट्रकों का भी दबाव है। दस से लेकर 20 चक्के वाले दर्जनों ट्रकों का रोज आना-जाना होता है।
सड़क से गिट्टी-अलकतरा खत्म हो जाने के कारण लोग धूल से परेशान हैं। इस सड़क पर मास्क लगाकर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। आटो चालक उस रोड में जाना नहीं चाहते। लोगों के घरों में धूल घुस रही है। घर साफ करते-करते गृहणियां परेशान हैं।

विभाग के कार्यपालक अभियंता ज्ञान विभाकर ने कहा कि उक्त सड़क की शीघ्र मरम्मत कराई जाएगी। उन्होंने मुशहरी जेई को आदेश भी दिया है, जबकि सड़क बनाने वाले संवेदक को सड़क का पांच साल मेंटनेंस भी करना है। विभाग की अनदेखी से लोग टूटे सड़क से चलने को मजबूर हैं।
