मुजफ्फरपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) के मामले सामने आ रहे है। मुजफ्फरपुर के अलावा शिवहर, सीतामढ़ी, मोतिहारी और अररिया से बीमार बच्चे श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) पहुंच रहे हैं। बीते वर्षो में बच्चों के बीमार होने और मौत के आंकड़ों को देखकर स्वास्थ्य विभाग ने कई स्तर पर तैयारी की है।
इसमें अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने से लेकर जागरूकता अभियान तक शामिल हैं। वैसे इन तैयारियों के बीच कई जगह खामियां भी उजागर हो रही हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ी है। तैयारियों और समीक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसमें मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डा. बीरेंद्र कुमार निलंबित हो चुके हैं।
एसकेएमसीएच में 100 बेड का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) काम कर रहा है। केजरीवाल अस्पताल में 60 और सदर में 10 बेड की सुविधा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी दो-दो बेड का विशेष वार्ड तैयार है। हालांकि, दवाओं को लेकर दूसरी तस्वीर सामने आ रही है।
जिले में एईएस की तैयारी का जायजा लेने वाली एजेंसी केयर इंडिया का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मानक आपरेटिंग प्रक्रिया के अनुसार दवा उपलब्ध नहीं है। जांच के दौरान पाया गया कि सदर अस्पताल समेत पीएचसी में एईएस पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए जो वार्ड बनाए गए हैं, उनमें मानक के अनुसार दवा नहीं हैं।
अब वहां मानक के अनुरूप दवा उपलब्ध कराने की कवायद की जा रही है। प्रखंडों से लेकर सदर अस्पताल तक से रेफर करने की प्रवृत्ति इलाज में बड़ी बाधा है। इसी रवैये से शिवहर के एक बच्चे की मौ’त हो गई। गणेशपुर टोला निवासी कमलेश पटेल पुत्र आशीष को तेज बुखार और बेहोशी की स्थिति में लेकर सात अप्रैल को सदर अस्पताल पहुंचे थे।
चिकित्सकों ने एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। वहां पहुंचे तो पीएमसीएच, पटना रेफर कर दिया गया। पीएमसीएच में बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया गया। वहां से आइजीआइएमएस गए, वहां से भी लौटा दिया। थक-हार कर आठ अप्रैल को निजी अस्पताल ने भर्ती कराया, लेकिन नौ अप्रैल को बच्चे की मौ’त हो गई। एईएस से बचाव के लिए जिलों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आशा, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, जीविका दीदियों व विकास मित्रों के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। सेमिनार व कार्यशाला के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
