झुलसाने वाले गर्मी से सावधान रहें बिहार के लोग, घट सकती है बक्‍सर जैसी घटना….

बिहार में गर्मी लोगों को झु’लसा रही है। ऐसे में यदि सावधानी नहीं बरती गई तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। कुछ ऐसी ही घ’टना बक्‍सर से सामने आई है। शुक्रवार की दोपहर शहर के बाइपास रोड स्थित शांतिनगर पुल के समीप एक अ’धेड़ की मौ’त अचानक हो गई। बताया जाता है कि साइकिल से आ रहा अ’धेड़ वहां आराम करने के लिए जैसे ही रुका कि अचानक उसके प्राण पखेरू उड़ गए।  घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची नगर थाने की पुलिस ने तत्काल अधेड़ को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां जांच के बाद चिकित्सक ने मृ’त घो’षित कर दिया।

डाक्‍टर ने बताया, लक्षण से लू की आशंका 

नगर थानाध्यक्ष दिनेश कुमार मालाकार ने बताया कि स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना दोपहर की है, तब तेज धूप के बीच साइकिल सवार एक अधेड़ सुस्ताने के लिए वहीं लेट गए थे। लेटने के कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान सिविल लाइन निवासी 50 वर्षीय गोपाल तिवारी के रूप में की गई है। सूचना पर पहुंचे मृतक के पुत्र ने बताया कि पुलिस लाइन के समीप उन्होंने नई जमीन ली थी और वहीं से बालू आदि हटाकर आ रहे थे। मृतक के पास एक साइकिल के अलावा निर्माण सामग्री ढोने वाली लोहे की एक तगाड़ी भी थी। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि मौत के लक्षणों से लू लगने से मौत प्रतीत हो रही है, वैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्‍पष्‍ट कहा जा सकता है।

इलाज में देर होने पर जा सकती है जान 

डाक्‍टर का कहना है कि लगातार एक या दो घंटे कड़ी धूप में रहने से शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है। इससे शरीर के आंतरिक अंगों विशेषकर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे बचाव के लिए रोगियों के शरीर के तापमान को तुरंत कम करना जरूरी है। इसके लिए सभी चिकित्सा प्रभारियों को ठंडे पानी से पूरे शरीर का स्पांज कर बाहर से तापमान कम करने और ग्लूकोज ड्रिप चढ़ाकर आंतरिक तापमान कम कराने को कहा गया है। इलाज में देरी होने से मस्तिष्क व किडनी को गंभीर क्षति हो सकती है और कई बार रोगी की मौत भी हो जाती है।

ये लक्षण हों तो तुरंत जाएं अस्पताल 

त्वचा गर्म और लाल हो, पसीना नहीं आए, नाड़ी व सांस की गति तेज हो जाएं, डर-हताशा, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, उल्टी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, चलने में परेशानी, बेहोशी इसके लक्षण हैं। ऐसे में मरीज को तुरंत छांव व हवादार जगह में जाने के साथ नजदीकी अस्पताल जाना चाहिए।

इन लोगों को खतरा ज्यादा

यूं तो देर तक धूप में रहने पर किसी को भी यह हीट स्ट्रोक हो सकता है लेकिन 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को इसका ज्यादा खतरा होता है।

बचाव को इन बातों का रखें ख्याल

  • दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक बाहर निकलने से परहेज करें।
  • प्यास लगने का मतलब है शरीर में पानी कम हो गया है, ऐसी स्थिति नहीं आने दें, भरपूर पानी पीते रहें।
  • धूप में जाना ही पड़े तो लगातार नहीं रहें, बीच-बीच में छांव या ठंडी जगह पर आराम करते रहें।
  • हल्के रंग के सूती और ऐसे ढीले कपड़े पहन कर बाहर जाएं जिससे शरीर का अधिकतर हिस्सा ढंका रहे।
  • खाना बनाते समय खिड़की-दरवाजे खुले रखें ताकि रसोईघर का तापमान अधिक नहीं होने पाएं और बीच-बीच में दूसरे ठंडे कमरे जाकर आराम करें।
  • नशीले पदार्थों व चाय-काफी, उच्च प्रोटीन युक्त पदार्थों और बासी भोजन का सेवन नहीं करें।
  • यदि थकावट या शरीर में ऐंठन जैसे हल्के लक्षण भी हों तो तुरंत डाक्टर से सलाह लें।

 

 

 

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