पुलिस की वर्दी का रौब हर कोई जानता-समझता है। इसी हनक के कारण कई लोग पुलिस के पेशे से जुड़ना चाहते हैं। मगर कई ऐसे भी हैं जिनकी योग्यता तो नहीं रहती, लेकिन इच्छा जरूर होती है कि पुलिस बनकर रौब झाड़ें। इसी इच्छा को पूरा करने के फेर में वह अपराध कर बैठता है और वह भी वर्दी की आड़ लेकर।

ऐसा ही मामला मुंगेर के नक्सल प्रभावित धरहरा प्रखंड के लडैयाटांड़ थाना क्षेत्र से सामने आया है। यहां के गोविंदपुर गांव से सोमवार देर रात पुलिस ने एक फर्जी दारोगा को पकड़ा है। यह बेगूसराय में तैनात होने की बात गांव वालों को बताता था और आए दिन धौंस दिखाता था। बताया जा रहा है कि वह लगभग पांच वर्ष से फर्जी रूप से दारोगा बनकर घूम रहा था।

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर गोविंदपुर से एसपी मुंगेर के निर्देश पर बनी विशेष टीम और लडैयाटांड़ थाना पुलिस ने इस फर्जी दारोगा को पकड़ लिया है. फर्जी दरोगा को पहचान राहुल पासवान के रूप में हुई है। इसके पिता जहां महगामा पंचायत के वार्ड सदस्य है तो पत्नी महगामा पंचायत की पंचायत समिति सदस्य है।

मिली जानकारी के मुताबिक राहुल पासवान खुद को बेगूसराय में तैनात होने की बात गांव वालों को बताता था। और पिछले पांच वर्षों से फर्जी दरोगा के रूप में वर्दी पहन लोगों से अवैध उगाही का काम किया करता था. इतना ही नहीं अपनी स्कॉर्पियो पर पुलिस वाला सायरन भी लगा रखा था और आए दिन लोगों पर रौब झाड़ता फिरता।

जानकारी के मुताबिक फर्जी दारोगा गांव में भी वर्दी और पिस्टल के साथ सायरन लगे वाहन से आता था. गांव वालों को भी लगता था कि यह सही में दारोगा है. जिसके बाद धीरे-धीरे जब पोल खुलती गई तो स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत मुंगेर एसपी जेजे रेड्डी को कर दी. एसपी ने बताया कि फर्जी दरोगा की सूचना मिलते ही टीम गठित कर छापेमारी के लिए भेजी गई और उसे गोविंदपुर से दबोच लिया गया। एसपी ने बताया कि इस मामले की पूरी तरह से जांच की जा रही है जिसके बाद विशेष जानकारी दी जाएगी।
