मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत सूबे के सभी विश्वविद्यालय से जुड़े कालेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ग्रेडिंग कराना अनिवार्य होगा। मूल्यांकन कराने के बाद प्राप्त ग्रेड को बरकरार रखना भी कालेजों के लिए बड़ी चुनौती होगी। नैक की ग्रेडिंग से ही अब प्राध्यापकों का पे-स्केल तय होगा। इस ग्रेडिंग का प्रभाव अब कालेजों को विभिन्न मदों में मिलने वाले अनुदान पर भी पड़ेगा। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा नैक मूल्यांकन को लेकर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
इसके लिए यूजीसी ने विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर कार्य करना शुरू कर दिया है। योजना के अनुसार यदि किसी कालेज को नैक से ए ग्रेड मिला है और दूसरे चरण के मूल्यांकन में कालेज उस ग्रेड को कायम नहीं रख पाता है तो इसका असर कालेज की वित्तीय व्यवस्था पर भी पड़ेगा। यहां कार्य करने वाले प्राचार्य से लेकर प्राध्यापक तक के पे-स्केल पर भी इसका असर होगा। उच्च शिक्षण संस्थानों में लगातार शिक्षा में आ रही गिरावट को कम करने के लिए यह पहल की जा रही है।

प्रीमियर कालेजों के लिए ग्रेड कायम रखना चुनौती
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में वर्तमान में 42 अंगीभूत और 64 संबद्ध डिग्री कालेज हैं। इसमें से करीब डेढ़ दर्जन अंगीभूत कालेजों का ही नैक मूल्यांकन हुआ है। इनमें भी आधा दर्जन कालेज ऐसे हैं जिनकी पहले टर्म की वैधता समाप्त हो चुकी है। दूसरे चरण के मूल्यांकन के लिए आवेदन करने पर उनके सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) को नैक निरस्त कर चुकी है।
ऐसे में मुख्यालय स्थित प्रीमियर कालेजों को भी अपना ग्रेड कायम रखना बड़ी चुनौती बन गई है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय को नैक से ग्रेड बी मिला हुआ है। वहीं एकलौते एलएस कालेज को ग्रेड ए मिला है। इन दोनों की पहले चरण की वैधता समाप्त हो गई है।
बीआरएबीयू के कुलसचिव प्रो. आरके ठाकुर ने कहा कि अब कालेजों को अनिवार्य रूप से नैक मूल्यांकन कराना होगा। सिर्फ नामांकन, परीक्षा और पास कराने की परंपरा अब बंद हो जाएगी। नैक मूल्यांकन का असर अब अनुदान और पे-स्केल पर भी पड़ेगा। सभी संस्थानों को नैक मूल्यांकन कराना अनिवार्य है।
