पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च का विश्लेषण, बिहार में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर अधिक हो रहा खर्च

पटना : समाज के प्रत्येक हिस्से को प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में बिहार का खर्च कई अन्य राज्यों से न सिर्फ अधिक है, बल्कि कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जिनमें अन्य राज्यों से औसत अधिक खर्च किया जा रहा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक ग्रामीण विकास शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रभावशाली क्षेत्रों में राज्य का व्यय कुछ बड़े राज्यों से भी अधिक है। यह विश्लेषण वित्तीय वर्ष 2022-23 के राज्यों के बजटीय प्रावधान पर आधारित है।

शिक्षा पर बिहार के चालू बजट में 18.4 प्रतिशत राशि का प्रविधान किया गया है। अन्य राज्यों ने इस मद में औसत 15.2 प्रतिशत राशि का आवंटन किया। शिक्षा पर बिहार से अधिक आवंटन छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश का है। इन दोनों राज्यों में इस मद में 18.9 प्रतिशत व्यय का प्रविधान है। स्वास्थ्य में बिहार से मामूली अधिक बजट राजस्थान का है।

बिहार में 7.2 और राजस्थान में 7.4 प्रतिशत राशि खर्च का प्रविधान किया गया है। यह उत्तर प्रदेश में 6.3, हरियाणा में 6.2, हिमाचल में 6.6 और झारखंड में 6.1 प्रतिशत है। देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो स्वास्थ्य विभाग का बजट औसत छह प्रतिशत है।

औसत खर्च में बिहार का स्वास्थ्य बजट अन्य राज्यों से अधिक है। हालांकि, कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियों में बिहार का व्यय अन्य राज्यों के औसत से कम है। बिहार बजट में इस मद में साढ़े तीन प्रतिशत राशि का आवंटन किया गया है।

जबकि देश के अन्य राज्यों का कृषि एवं उससे संबद्ध मदों पर खर्च का औसत 6.2 प्रतिशत है, लेकिन ग्रामीण विकास के मोर्चे पर बिहार की उपलब्धि अन्य राज्यों से बहुत अच्छी है। बिहार ने ग्रामीण विकास में कुल बजट का 10.6 प्रतिशत हिस्सा खर्च करने का प्रविधान किया है। अन्य राज्यों का औसत आवंटन 5.7 प्रतिशत है। पुलिस पर खर्च के मामलों में भी बिहार का व्यय (5.4)अन्य राज्यों के औसत (4.3)से अधिक है।

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