पश्चिम चंपारण। एक ऐसा स्कूल, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ अनुशासित दिनचर्या की सीख दी जाती है। बोलचाल और परस्पर व्यवहार में शिष्ट आचरण के बीज बोए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि जगाई जाती है। यानी संस्कारों के चाक पर बच्चों के व्यक्तित्व को आकार दिया जा रहा है।
यह स्कूल है, पश्चिम चंपारण में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर में रोहुआ टोला प्राथमिक विद्यालय, जो पढ़ाई के साथ विविध गतिविधियों के लिए भी चर्चित है। इन गतिविधियों ने स्कूल को लोकप्रिय बनाने के साथ 2019-2020 में अनुमंडल का सर्वोत्कृष्ट विद्यालय भी बना दिया
वर्ष 2000 में जंगलवर्ती इलाके में स्थापित इस स्कूल में शुरू के एक-दो वर्षों में बच्चों की संख्या ठीक रही। बाद के वर्षों में गिरावट आने लगी। अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। वर्ष 2007 में छात्रों की संख्या 22 रह गई थी। इलाके में शिक्षा के प्रति घटती रुचि देख शिक्षकों ने गांवों में जाकर लोगों से मुलाकात की। उन्हें शिक्षा के बारे में जागरूक किया गया।
शिक्षकों की टीम सुबह-शाम गांवों में जाती और लोगों को समझाती। इसका असर हुआ और बच्चे आने लगे। उन्हें स्कूल में रोकने के लिए विविध गतिविधियां शुरू कीं। वर्तमान में वहां 200 से अधिक छात्र हैं। शिक्षकों के प्रयास से यहां की तस्वीर बदल गई है। अब यहां स्मार्ट क्लास लगती है। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग टायलेट, मध्याह्न भोजन कक्ष, दीवारों पर रंग-रोगन और चित्रकारी हैं।
हेडमास्टर लखन प्रसाद बताते हैं कि स्कूल में पढ़ाई के साथ स्वच्छता और हरियाली पर भी जोर दिया जा रहा है। बच्चों में खेल-खेल में पढऩे की कला विकसित की जा रही है। छात्रों के अंदर सीखने की कला विकसित हो, इसके लिए कक्षा के भीतर महीनों व दिनों के नाम और अंग्रेजी अल्फाबेट्स आदि की पेंटिंग कराई गई है। स्कूल में 50 से अधिक पेड़ हैं, जिन्हें महापुरुषों, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों के नाम दिए गए हैं।
