सीतामढ़ी। जानकी नवमी पर तैयारी चल रही है। यह माता सीता की जन्मस्थली है। यहां कण-कण में जानकी तो घर-घर में उनकी पूजा होती है। सीतामढ़ी और आसपास मंदिरों की ऐसी शृंखला है, जो भक्तों को आकर्षित करती है। हर मंदिर की अपनी विशेषता है।
कई का इतिहास रामायणकाल से जुड़ा है। ये मंदिर 14 कोसी परिक्रमा स्थल में पड़ते हैं। जानकी नवमी पर इन स्थानों पर माता सीता की डोली पहुंचती है। परिक्रमा का आरंभ जानकी नवमी से 20 दिन पहले होता है।
इसके लिए रजत द्वार जानकी मंदिर से निकली डोली डेढ़ दर्जन स्थानों तक पहुंचती है। इनमें तीन पौराणिक स्थल हैं। ये सभी रामायणकाल के बताए जाते हैं। साधु-संतों और भक्तों के साथ यह डोली जिन-जिन गांवों से गुजरती है, वहां भव्य स्वागत होता है।
माता सीता की पूजा की जाती है। यात्रा में शामिल लोगों के भोजन व आवास की व्यवस्था वहां के मंदिर के महंत करते हैं।
अंगवस्त्र देकर विदा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि डोली जिन गांवों से गुजरती है, वहां धन-धान्य की प्रचुरता रहती है। जानकी नवमी के दिन डोली के साथ नगर क्षेत्र में परिक्रमा की जाती है।
