अशिक्षित ग्रामीण महिलाएं को साक्षर बनाने के लिए उठाया गया कदम, दिखने लगा परिणाम, जानें विस्तार से…

मुजफ्फरपुर। जब कुछ सीखने की ललक हो तो सामाजिक बेड़िया खुद ब खुद हट जाती है। कुछ इसी तरह से अशिक्षित ग्रामीणों का भी है। जो अशिक्षित होने के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिक महिलाएं अपने अधिकार के बारे में विस्तार से नहीं जानती है।

उनके लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का लाभ किस प्रकार से लिया जाए, पता नहीं होता। बिचौलिये पैसा ऐंठ लेते है। ऐसे महिलाओं को शिक्षित करने के उद्देश्य से सरैया प्रखंड के रामकृष्ण दुबियाही निवासी शशिरंजन चार साल से नि:शुल्क अभियान चला रहे हैं।

बारह सौ से अधिक महिलाओं को साक्षर बना चुके है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियर शशिरंजन 2015 में पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड में ग्रामीण आवास सहायक थे। वहां देखा कि योजनाओं का लाभ देने के लिए निरक्षर श्रमिक सहित अन्य महिलाओं को बिचौलिए ठगी का शिकार बनाते हैं।

 

यहीं से उन्होंने महिलाओं को जागरूक और साक्षर बनाने की पहल शुरू की। दिन में काम के बाद शाम को पाठशाला में महिलाओं को शिक्षा देनी शुरू की। मुजफ्फरपुर में 2018 में इसकी शुरुआत की। बीच में दो वर्ष तक कोरोना के कारण यह पहल थोड़ी कमजोर पड़ी। अब फिर से इसे शुरू किया गया है।

 

महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए पहले जागरूक किया जाता है। फिर शाम को चलने वाली पाठशाला से जोड़ा जाता है। शुरुआत में उनकी टीम महिलाओं को साक्षर बनाती है। इसके बाद उसी इलाके में से 10वीं और उससे अधिक पढ़ी-लिखी महिला को इसकी कमान सौंपी जाती है। समय-समय पर सरकारी योजनाओं व अधिकार की जानकारी के लिए विशेषज्ञों को बुलाया जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए भी विशेषज्ञ आते हैं। शाम की पाठशाला पूर्णिया के साथ मुजफ्फरपुर के साहेबगंज प्रखंड के हुस्सेपुर, सीतामढ़ी और मोतिहारी में भी संचालित हो रही है। पूर्णिया में अबतक एक हजार व मुजफ्फरपुर में 200 से अधिक महिलाएं साक्षर हुई हैं।

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