PATNA : हाशिए पर जाने के भय से परेशान ऐसे नेता तलाश रहे नया आशियाना

पटना। राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी संयुक्‍त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) या बिहार की बात करें तो महागठबंधन से छूट गए दलों और नेताओं की सियासी छटपटाहट सामने आने लगी है। हाशिए पर जाने के भय से परेशान ऐसे नेता नया आशियाना तलाश रहे हैं। तीसरी ताकत बनाने की कवायद आरंभ है। दिग्गजों ने सामाजिक समीकरण और जोड़तोड़ पर फोकस बढ़ा दिया है।

ऐसे नेताओं में चर्चित आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद से लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, जन अधिकार पार्टी (जाप) के संरक्षक और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव, जहानाबाद सांसद अरुण कुमार और मोकामा से निर्दलीय विधायक अनंत सिंह शामिल हैं। ये वो नेता हैं, जिन्‍हें अभी तक न तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार व बिहार की नीतीश सरकार के गठबंधन ‘राजग’ तथा विपक्षी ‘संप्रग’ या बिहार में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्‍व वाले महागठबंधन में जगह नहीं मिल सकी है।

तीसरी ताकत खड़ी करने की पहल

यही वजह है कि इन नेताओं ने तीसरी ताकत खड़ी करने की पहल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को शिवहर संसदीय क्षेत्र के ढाका में किसान पंचायत लग रही हैं, जिसमें रालोद प्रमुख अजित सिंह समेत यूपी, हरियाणा एवं मध्य प्रदेश के किसान नेताओं को आमंत्रित किया गया है। यूपी के किसान नेता राकेश टिकैत, हरियाणा के गुरनाम सिंह एवं मध्य प्रदेश के इरफान जाफरी ने आने की सहमति भी दे दी है।

कौन किसका साथ देगा, चर्चाएं गर्म

लवली 2015 का विधानसभा चुनाव पांच सौ से कम वोटों से हारी थीं। आगामी लोकसभा चुनाव काे लेकर उन्‍हें उम्‍मीद है। लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में कौन किसका साथ देगा इसे लेकर चर्चाएं गरमाने लगी हैं, लेकिन अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। वैसे नेता सामाजिक फार्मूले के हिसाब से सियासी अनुलोम-विलोम में जुटे हैं।
उभर सकते हैं नए समीकरण

प्रदेश में कई और ऐसे नेता हैं जिनका राजनीतिक भविष्य अभी तय नहीं है। इसमें पटना साहिब सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और वैशाली सांसद राम किशोर सिंह शामिल हैं। भाजपा से पूर्णिया के पूर्व सांसद रहे उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह की भी पार्टी से आस्था डगमगाने लगी है। कमोबेश ऐसी ही स्थिति भाजपा से निलंबित चल रहे दरभंगा सांसद कीर्ति झा आजाद की है। ऐसे में हो सकता है बिहार में कुछ हैरान करने वाले समीकरण उभर कर आएं। खरमास बाद सियासी-सामाजिक समीकरणों और जरूरतों के हिसाब से कई नेताओं का पाला बदलना तय माना जा रहा है।

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