दंतेवाड़ा . जिले के समेली गांव में एक युवती का शव रविवार सुबह मुनगा पेड़ पर लटका मिला। पेड़ घर से महज 50 मीटर दूर है। युवती ने सितंबर में फोर्स के जवानों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। युवती की मौत की जानकारी मिलते ही एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव समेली पहुंचे, साथ में सुरक्षा बलों की टीम भी थी।
लेकिन युवती के परिजन तब तक शव को पेड़ से उतार चुके थे। एक तरफ पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, साथ ही हत्या कर पेड़ पर लटकाने का संदेह भी जाहिर कर रही है। घटनास्थल पर समाजसेवी सोनी सोढ़ी भी पहुंचीं। युवती के परिजन ने आरोप लगाया कि समाजसेवी बार-बार उससे पूछताछ करने आ जाते थे, इससे वह परेशान हो गई थी।
उसे अपनी बदनामी की चिंता भी थी, अक्सर वह आत्महत्या करने की बात कहती थी। सितंबर में समेली में नाले के पास एक युवती बेहोश मिली थी। ग्रामीणों ने जवानों द्वारा दुष्कर्म करने की आशंका जाहिर की।

संवेदनशीलता देखते हुए दो बार 5 डाॅक्टर्स ने मेडिकल किया, पर दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। युवती का हीमोग्लोबिन कम मिला। पूछताछ में युवती ने 2 अलग-अलग बयान दिए। अस्पताल के जिस वार्ड में वह भर्ती थी, वहां पुलिस ने खुफिया कैमरा लगाया, रिकार्डिंग में युवती पर कुछ लोग दबाव बनाते दिखे।
इसके बाद युवती ने परिजन के साथ दो बार अस्पताल से भागने का प्रयास किया। पुलिस ने घटना को सुरक्षा बलों को बदनाम करने की नक्सली साजिश बताया।
सबसे बड़ा सवाल
3 माह पहले दंतेवाड़ा पुलिस ने दावा किया- युवती को कुछ लोगों ने बरगलाया, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। उनके खिलाफ ऑडियाे रिकाॅर्डिंग है।
लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। युवती के बयान के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। युवती की मौत के बाद पुलिस फिर सामाजिक कार्यकर्ताओं के एंगल को बाहर ले आई है।
पूछताछ करते रहते थे समाजसेवी और पुलिस
मेरी बहन से दुष्कर्म हुआ या नहीं मुझे नहीं मालूम। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म न होने की बात थी। अस्पताल से जब वह घर पहुंची तो पूछताछ के लिए दिल्ली-रायपुर से समाजसेवी 2-3 बार आए। बार-बार पूछताछ से परेशान थी। हमेशा कहती थी कि मैं बदनाम हो गई हूं। अरनपुर थाना में भी पुलिस ने दो बार बुलाया। बहन ने दो अलग-अलग बयान दिए थे। घर आने पर माता-पिता से विवाद भी हुआ था। वह परेशान थी। एक बार उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया था। गाय चराने जाते वक्त यही कहती थी- मर जाऊंगी। -जैसा मृत युवती के चचेरे भाई ने भास्कर को बताया।
हमने पीड़िता को नहीं माता-पिता को बुलाया
प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला लग रहा है। यह भी हो सकता है हत्या कर शव पेड़ पर लटकाया हो। पीएम रिपोर्ट के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि समाजसेवी जाकर युवती से पूछताछ कर बार-बार परेशान करते थे। दुष्कर्म न होने के बाद भी इसी तरह की बातें किए जाने के कारण उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। पूछताछ के लिए पीड़िता को नहीं उसके माता-पिता को बुलाया जाता था। पीड़िता का बयान धारा 164 के तहत लिया था। पूछताछ के लिए सखी सेंटर की मदद ली थी।