जिला शिक्षा कार्यालय और उससे संबंधित स्थापना विभाग में मध्याह्न भोजन व सर्व शिक्षा अभियान के कार्यालय के कार्य को लेकर विवाद चल रहा है। शिक्षक नियोजन में किसी पंचायत में अलग पैमाना और दूसरी पंचायत में अलग पैमाने का मामला आज भी जांच के दायरे में है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक मामले की जांच कर रहे हैं। कस्तूरबा विद्यालय में भी शिक्षकों के नियोजन को लेकर विवाद चल रहा है।

निजी विद्यालयों की क्षतिपूर्ति राशि की निकासी के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं होने को लेकर भी स्थापना कार्यालय घिरा हुआ था। लेकिन, ताजा बवंडर विगत पांच मई को हुए मध्याह्न भोजन के तीन साधन सेवियों की बहाली को लेकर उठा है। मध्याह्न भोजन योजना समिति के जिला तथा प्रखंड स्तर के नियोजन सेवा शर्त अनुदेश की कंडिका तीन के अनुसार नियोजन समिति के अध्यक्ष जिला पदाधिकारी होते हैं।

लेकिन, आरोप लगा है कि तीन साधन सेवी की बहाली में जिलाधिकारी को भी दरकिनार कर दिया गया है। इतना ही नहीं वर्ष 2019 में मध्याह्न भोजन के जिला साधन सेवी की बहाली के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। तीन वर्ष तक परीक्षा का परिणाम भी घोषित नहीं किया गया। अचानक विगत मार्च में इस प्रक्रिया को आरंभ किया गया। मई आते-आते बहाली भी कर दी गई। इस बहाली को लेकर जो बवंडर उठा है वह जिला में तो प्रभाव दिखा ही रहा है पटना में भी हलचल मच गई है।

कैसे बनी बहाली की योजना
मध्याह्न भोजन के प्रखंड साधन सेवी की बहाली को लोग भूल भी गए थे। लेकिन, जिला शिक्षा कार्यालय में कुछ लोग बैठे हुए हैं जो इन सब पर नजर बनाए रखते हैं। उन्होंने अपने अनुकूल वातावरण पाकर बहाली का राग छेड़ दिया। फिर क्या था। तुरंत मध्याह्न भोजन उपनिदेशक को अवगत कराया गया कि जिले में साधन सेवियों की बहाली के लिए सभी प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है । इसके आलोक में उपनिदेशक ने 28 मार्च को अवगत कराया कि यदि सभी प्रक्रिया पूरी हो गई है तो बहाली की जा सकती है। बहाली प्रखंड स्तरीय साधन सेवी के रूप में तीन व्यक्तियों की हुई है। इनमें अनुसूचित जाति महिला संगीता कुमारी, अनारक्षित वर्ग से राहुल आनंद और अत्यंत पिछड़ी जाति से दीपमाला कुमारी शामिल हैं। आर्थिक रूप से कमजोर महिला का पद रिक्त घोषित कर दिया गया है।

