पश्चिम पंचारण। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में जिन किसानों के खेत हैं उनके लिए यहां खेती करना जान पर बन आई है। आय दिन किसान हिं’सक वन्यजीवों का शि’कार हो रहे हैं। बीते पांच माह में करीब आधा दर्जन किसान जं’गली जानवरों का शि’कार हुए हैं, जबकि इससे अधिक गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
इससे आसपास के इलाकों में खेती प्रभावित हो रही है। ड’र के कारण आधा दर्जन से अधिक प्रखंडों के 40 से 50 किसान खेती छोड़ चुके हैं। वीटीआर से सटे करीब एक हजार एकड़ से भी ज्यादा भूमि पर किसान धान, गेहूं, सब्जी और गन्ने की खेती करते हैं।
बताया जा रहा है कि 14 मई को चिउटाहां वन क्षेत्र में बाघ के ह’मले में एक किशोर की मौ’त हो गई। हरनाटांड़ वन क्षेत्र से सटे कला बरवा गांव में भी बाघ के ह’मले में एक किशोर बुरी तरह ज’ख्मी हो गया, जिसका इलाज पहले गोरखपुर अब हरनाटांड़ में चल रहा है। 20 मई को यहीं खेत देखने गई एक महिला को बाघ ने मा’र डा’ला।
ह’मले के दौरान मृ’तका की पुत्री ने पेड़ पर चढ़कर अपनी जा’न ब’चाई। 23 मई को गोबर्द्धना में भालू के ह’मले में दो किसान गंभीर रूप से जख्मी हो गए। 27 मार्च को हरनाटांड के जं’गल से निकले भैंसे ने एक किसान पर ह’मला कर दिया, जिससे उसकी मृ’त्यु हो गई। उसी माह उक्त भैंसे ने मदनपुर वन क्षेत्र के गोबरहिया गांव में भी एक किसान सहित दो मजदूरों पर ह’मला कर घायल कर दिया था।
मांसाहार ही नहीं, शाकाहार जानवर भी किसानों की परेशानी का सबब हैं। भले ही ये कम ह’मलावर हैं, लेकिन तैयार फसलों को चट कर जाते हैं। भालू और सुअर गन्ने की फसल को ब’र्बाद कर देते हैं, जबकि खरगोश, नीलगाय और हिरण सब्जी समेत धान व गेहूं की फसल नष्ट कर देते हैं। इनकी शिकार के लिए हिं’सक जानवर जंगल से निकल किसानों को अपना शि’कार बना रहे हैं। हरनाटांड़ के किसान मनोज सिंह, नरेश चौधरी व बुधन चौधरी कहते हैं कि रात में जानवर परेशान करते हैं तो दिन में बंदरों का भ’य बना रहता है। जानवरों के भ’य से किसानों ने फसलों की रखवाली तक बंद कर दी है। बीते दिनों रिहायशी इलाके से सटे सरेह में हिंसक जानवरों के दिखने से किसानों की हिम्मत टूट चुकी है।
