Char Dham Deaths: केदारनाथ में अब बड़ी संख्या में बे’जुबानों की मौ’त, नदी में बहाए जा रहे मृ’त जानवर!

रुद्रप्रयाग : चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की लगातार मौतें एक तरफ चिंता का विषय बनी हुई हैं, तो अब श्रद्धालुओं को धाम तक ले जाने वाले खच्चरों की मौतें एक नया टेंशन बन गई हैं।

केदारनाथ यात्रा में दर्जनों खच्चरों की मौत हो चुकी है और इससे भी बड़ा संकट ये है कि इनके शवों की अंतिम क्रिया ठीक ढंग से करने के बजाय इन्हें नदी में बहा दिया जा रहा है। दिनबदिन चूंकि श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, तो ज़ाहिर है कि नदी में स्नान करने और नदी का पानी पीने वाले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में बड़े खतरे की आशंका भी ज़ाहिर की जा रही है।

केदारनाथ यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले घोड़े-खच्चरों की एक के बाद एक दर्दनाक मौत हो रही है। अब तक 60 घोड़े खच्चरों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यात्रा में घोड़ों-खच्चरों के संचालन की व्यवस्था देखने वाली जिला पंचायत से लेकर पर्यटन मंत्री तक कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं, लेकिन इनकी मौत की घटनाएं रुक नहीं रहीं। ज़िम्मेदार क्या कह रहे हैं? इससे पहले आपको बताते हैं कि इन जानवरों की मौतों के पीछे कारण क्या हैं।

— केदारनाथ की खड़ी चढ़ाई पर यात्रियों को ले जाते समय गर्म पानी का नहीं मिलना।
— बीमार होने पर चिकित्सा की कोई व्यवस्था न होना।
— पौष्टिक आहार की बेहद कमी।
— बिना आराम के दिन में केदारनाथ के कई चक्कर लगाए जाना।

इसके अलावा, कुछ हादसे भी जानवरों की जान लेने की वजह बन रहे हैं। 27 मई को ही पैदल मार्ग में करंट लगने से दो खच्चरों की मौत हो गई। इस हादसे में तीर्थयात्री बाल बाल बचे। भूमिगत बिजली की लाइन के साथ पेयजल लाइन लीकेज के कारण यह हादसा गौरीकुंड के पास घोड़ा पड़ाव में हुआ। इस हादसे के बाद डीएम ने ऊर्जा निगम व जल संस्थान के अफसरों को तलब किया।

नदी में मृत जानवरों को बहाया जाना खतरनाक?
शव नदी में डाले जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि परंपरागत ढंग से उन्हें दफनाया जाना चाहिए। ऐसे नदी में डालने से किसी महामारी का खतरा हो सकता है। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी जानवरों को ठीक से दफनाने की बात करते हुए कहा कि जानवरों पर अत्याचार करने वाले मालिकों पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

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