नई दिल्ली। किसान, एक ऐसा शब्द जो राजनीतिक समर में खूब सुनने को मिलता है। हाल में पांच राज्यों में हुए चुनाव में भी कांग्रेस ने किसानों के लिए बढ़-चढ़कर दावे किए और तीन राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब रही। लगभग सभी पार्टियां चुनाव से पहले किसानों की दुर्दशा को लेकर खूब राजनीति और दावे करती हैं। बावजूद किसानों की दशा जस की तस बनी हुई है। यूपी में अब किसान की दुर्दशा का एक अनोखा मामला सामने आया है।
यूपी के आगरा शहर में नगला नाथू ब्लॉक बरौली अहीर के रहने वाले किसान प्रदीप शर्मा को 19 हजार किलो आलू बेचने पर मात्र 490 रुपये बचे। इसे भी किसान ने अपने पास रखने की जगह, डीडी बनवाकर प्रधानमंत्री कार्यालय को भिजवा दिया। किसान के अनुसार वह इस पैसों से कुछ भी नहीं कर सकता। लिहाजा उसने ये रकम सरकार को भेज दी कि वह देश के ही काम आ जाए।

किसान प्रदीप शर्मा के अनुसार बहुत मेहनत कर आलू की फसल तैयार की थी। उम्मीद थी कि बढ़िया दाम मिलेंगे तो कर्जा खत्म होगा और आगे की बुआई के लिए अच्छी तैयारी कर सकेंगे। साथ ही घर का खर्च भी निकल जाएगा। इसके विपरीत जो कमाई हुई है, उससे कर्ज चुकाना तो दूर, खेती में लगे मजदूरों के पैसे ही नहीं चुकाए जा सकते। न ही खाद, दवा, सिंचाई और बुआई का खर्च निकला। घर खर्च की तो सोची भी नहीं जा सकती।
कर्ज चुकाने को जमीन बेचने पर मजबूर
किसान प्रदीप शर्मा के अनुसार खेती की वजह से उन पर लगभग 20 लाख रुपये का कर्ज हो चुका है। उनके तीन बच्चे हैं। ऐसे में कर्ज चुकाना तो दूर उनके सामने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश की भी चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में उनके सामने अपनी जमीन बेचने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है। लिहाजा प्रदीप ने जिला प्रशासन से उसकी जमीन बिकवाने में मदद करने की गुहार लगाई है। उसने प्रशासन को भी अपनी जमीन खरीदने का प्रस्ताव दिया है। प्रदीप शर्मा ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि चार गुना न सही दो गुना दाम पर ही उसकी जमीन बिकवा दी जाए। अगर सरकारी योजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता है तो उसके लिए भी वह अपनी जमीन बेचने को तैयार है।
महाराष्ट्र में बेचा था आलू
प्रदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र की मंडी में आलू बेचा था। उन्होंने एक हैक्टेयर खेत में करीब 19 हजार किलो आलू पैदा किया था। ये पूरा आलू उन्होंने महाराष्ट्र में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद में बेचा था। आलू बेचने के बाद उन्होंने मंडी तक उसकी ढुलाई और कोल्ड स्टोरेज का किराया दिया। इसके बाद उनके पास केवल 490 रुपये बचे। इसके बाद प्रदीप शर्मा ने मंगलवार को ये रकम प्रधानमंत्री कार्यालय को ड्रॉफ्ट बनवाकर भेज दी। प्रदीप शर्मा के अनुसार सरकारें किसानों को उत्पादन का उचित मूल्य दिलाने की बात तो करती हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। इसलिए किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
एक हेक्टेयर की खेती पर खर्च का अनुमानित आंकलन
-7,000 रुपये सिंचाई पर
-8,000 रुपये दवा पर
-14,000 रुपये की खाद
-36,000 रुपये के बीज
-14,000 रुपये आलू के लिये खुदाई का खर्च
-12,000 रुपये मजदूरी
-5,500 रुपये ट्रैक्टर का किराया
-3,600 रुपये बुआई का खर्च