मुजफ्फरपुर। तंबाकू छोड़ चुके रोहित लोगों को गुटखा खाने के नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। मुंह में छाला होने पर दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव कुमार वर्मा के यहां इलाज कराने गया। वहां देखा मेरे जैसे चार और लोग मुंह के छालों के इलाज के लिए आए हुए हैं।
जांच में उन सब में कैंसर के प्रारंभिक लक्षण मिले। उसके बाद से इतना भयभीत हो गया कि निश्चय कर लिया तंबाकू अब मेरे जीवन का हिस्सा नहीं रहेगा। जान बच जाए यही बड़ी बात है। अब तो दूसरों को भी तंबाकू छोडऩे के लिए प्रेरित करुंगा।

डा. गौरव कहते हैं कि वे पिछले सात साल से इलाज कर रहे हैं। इस दौरान मरीजों को तंबाकू से दूर रहने के लिए प्रेरित भी करते हैं। उनके यहां मुंह के कैंसर वाले जितने भी मरीज आते हैं, उनमें 90 प्रतिशत तंबाकू के सेवन वाले होते हैं। गुटखा, खैनी, सिगरेट की इसमें अहम भूमिका है।

सिविल सर्जन डा. उमेश चंद्र शर्मा कहते हैं विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत डब्ल्यूएचओ द्वारा 1987 में की गई थी। इस दिन का उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक प्रसार को रोकना और उसके नकारात्मक प्रभावों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना था।
दुनिया में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण तंबाकू बनता है। जिला गैर संचारी पदाधिकारी डा. शिव शंकर ने बताया कि फेफड़ों की बीमारियां जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस व एम्फिसेमा की मुख्य वजह धूम्रपान ही है। मुंह का कैंसर तो आम बात है।
