मोतिहारी। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी एवं भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह एकादशी व्रत 10 जून शुक्रवार को हैं। आयुष्मान ज्योतिष परामर्श सेवा केन्द्र के संस्थापक साहित्याचार्य ज्योतिर्विद आचार्य चन्दन तिवारी ने बताया कि शास्त्र एवं पुराण में निर्जला एकादशी के व्रत का खास महत्व बताया गया है। यह सबसे कठोर व्रतों में एक है। इस दिन व्रती पानी का एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा के साथ अगर कोई इस दिन प्यासे और दूसरे जीव को पानी पिलाता है, तो उसे पूरे एकादशी व्रत का फल मिलता है। आचार्य चन्दन तिवारीने बताया कि जो श्रद्धालु साल के सभी 24 एकादशी का व्रत करने में सक्षम नहीं हैं, वे निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों के व्रत का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
बता दें कि हर साल 24 एकादशी होती है। जिस साल पुरुषोत्तम मास यानी मलमास पड़ता है, उस साल एकादशी की संख्या 26 हो जाती है। मान्यता है कि गर्मी के मौसम में काम आनेवाली वस्तुएं जैसे वस्त्र, जूता, छाता व फल आदि दान करने के साथ ही पूरे दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।
ज्यादातर लोग इस दिन शरबत आदि पेयजल बांटते नजर आते हैं, क्योंकि इस दिन जल से भरे कलश का दान अनिवार्य माना जाता है।

