पटना : बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में कई बार ऐसे मुद्दे आए जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष तो आमने-सामने आये ही, सत्ता पक्ष के भी दो सहयोगी दलों- बीजेपी और जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) भी आमने-सामने दिखे जिसके बाद बिहार की राजनीति में चर्चा का बाजार गर्म है। जेडीयू के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार में एनडीए मतलब नीतीश कुमार है, जब तक नीतीश कुमार हैं तभी तक एनडीए है।

बिना नीतीश कुमार के एनडीए का कोई मतलब नहीं है। अगर इस मामले में किसी को कोई गलतफहमी है तो वो गलतफहमी नहीं पालें। बिहार में एनडीए (NDA) की बुनियाद ही नीतीश कुमार की वजह से है और जब तक नीतीश कुमार हैं उनके बिना एनडीए की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

दरअसल उपेन्द्र कुशवाहा से जब सवाल किया गया कि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के नेता धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा था कि वर्ष 2025 तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहेंगे और राज्य में एनडीए के नेता नीतीश कुमार हैं। बिहार में जेडीयू के बीजेपी के रिश्ते अच्छे हैं। इसी पर उन्होंने यह बयान दिया है जिसके सियासी मायने खोजे जा रहे हैं।

वहीं, उपेन्द्र कुशवाहा से जब यह पूछा गया कि हाल के दिनों में कई ऐसे मुद्दे आए हैं जब आरजेडी और जेडीयू में नजदीकियां दिखी हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह सही है कि आरजेडी और जेडीयू की कई मुद्दों पर विचारधारा मिलती है, कई ऐसे मामले आए हैं जब किसी मुद्दे पर जेडीयू का जो रुख रहा है, वही रुख आरजेडी का भी दिखा है।


लेकिन, व्यावहारिकता में आरजेडी का रुख अलग दिखता है और कई बार यह दिखी भी है, लेकिन विचारधारा मिलने से आरजेडी के साथ जेडीयू आ जाएंगे यह फिलहाल नहीं कह सकते हैं। फिलहाल अभी तो हम एनडीए में हैं।
