जोधपुर में सोमवार को 18 घंटे तक चले हाई वोल्टेज घटनाक्रम के बाद सीआरपीएफ के जवान खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। अब इस मामले में दो VIDEO सामने आए हैं। इसमें वह बता रहा है कि आखिर ऐसा क्यों कर रहा है?

वीडियो में वह कह रहा है, ‘छोटा कर्मचारी होने से उसकी सुनवाई नहीं हो रही। संतरी की पोस्ट पर हूं और ऊपर के अधिकारी परेशान कर रहे थे। उसकी बात आईजी तक नहीं पहुंचती।’ नरेश जाट ने डीआईजी पर भी आरोप लगाया। कहा, ‘सभी जानकारी होने के बाद भी पूरी जांच नहीं करते।’

फिर उसने अपने गांव में रहने वाले दोस्त गजेन्द्र शर्मा से भी बात कर अपनी परेशानी बताई। उसक भी ऑडियो सामने आया है, जिसमें नरेश ने बताया कि उस पर राइफल कॉक (फायर करना) करने का आरोप लगाया गया है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।इसके कारण उसे न तो ड्यूटी पर लगाया जा रहा है, न ही किसी से मिलने दिया जा रहा है। ऐसा पांच दिन से चल रहा था। ऐसे में परेशान होकर उसने हवा में फायर किया। उसने वीडियो में बोला कि उस पर लगा आरोप झूठा था। बताया जा रहा है कि नरेश ने यह वीडियो सोमवार शाम को हवाई फायर के बाद बनाया।

नरेश ने वीडियो में ये कहा-
1 सितम्बर 2019 को RTC जोधपुर के नाम से सूरतगढ में रिपोर्ट किया। वहां से दो महीने बाद वापस जोधपुर पहुंचा। यहां पर ड्यूटी कर रहा था, लेकिन मुझे छुट्टी नहीं मिली तब में साहब के पास पहुंचा था। उसके बाद कोविड टाइम में आरटीपीसीआर लेने गया और एक्सिडेंट हो गया। जिससे छुट्टियां लेनी पड़ी तब डीआईजी भूपेन्द्र साहब ने बख्श दिया और ड्यृटी पर लिया।

इन्होंने मुझे सूरतगढ भेजा। वहां मेरे गार्ड कमांडर से झगड़ा हुआ। उसने मेरे हाथ पर काटा और बचाव में मेरी कोहनी से उसकी आंख पर लग गई, लेकिन उसने बोला कि मुझे राइफल के बट्ट से मारा।

नरेश ने बताया कि वह संतरी की पोस्ट पर था, इसलिए उसके नाम से राइफल इश्यू है। उसने राइफल कॉक करने की झूठी बात कही, जबकि मैने ऐसा कुछ नहीं किया। उसने कहा कि- आज राइफल कॉक किया है चार राउंड फायर किए सभी को पता चला, जबकि उस दिन मैने ऐसा कुछ नहीं किया। मेरे फायर करने पर सिविल पुलिस को बुलाया गया है।

सीआरपीएफ कमांडो लाए, उसे क्यों नहीं बुलाया गया। मैं 8 साल सिविल में ब्लैक बेल्ट रह चुका हूं। उसके बाद 2010 में ईओसी क्वालिफाइड हूं। नरेश ने कहा कि- कभी लोगों को परेशान नहीं किया। अपनी ड्यृटी अच्छे से की। मुझे फैमिली परमिशन होने के बावजूद सूरतगढ ड्यूटी पर भेजा गया।

उसने बताया कि उसे पांच दिन से कहीं आने जाने नहीं दिया जा रहा। मेरी ड़यूटी नहीं लगा रहे कहीं। मुझे गेट पास भी नहीं दिया जा रहा। उसने कहा कि छोटा कर्मचारी हूं मेरी कोई सुनता नहीं। हर कोई बोल रहा है, राइफल कॉक कर दिया, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। छोटे कर्मचारी को फंसाना हो तो यह बोल दो कि राइफल कॉक किया। उस समय नहीं, किया आज कर रहा हूं। यहां एसी(असिस्टेंट कमांडेंट) को डीसी(डिप्टी कमांडेंट) बना कर बिठाया है। डीसी नहीं है और हमारी सुनवाई नहीं होती है।