गया। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ है। इस कारण गुरू पूर्णिमा के साथ व्यास पूर्णिमा व आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने ही पहली बार मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया। बुधवार को जिले में यह पर्व हर्ष, उत्साह, श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा। शहर के देवघाट स्थित रामानुज मठ में गुरू पूर्णिमा पर साधु संतों का जमावड़ा लगेगा।
गया पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने बताया कि मठ में 11 बजे से गुरू पूजन प्रारंभ होगा। सर्वप्रथम वेंकुठवासी जगद्गुरु स्वामी श्रीश्री राघवाचार्य जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित की जाएगी। इसके बाद रात्रि में भजन संध्या व भोजन भंडारा का आयोजन होगा। गुरू पूर्णिमा पर मंदिर में विराजमान भगवान श्रीलक्ष्मी-नारायण का अभिषेक भी किया जाएगा।
कहा कि इस बार गुरू महोत्सव में भारत वर्ष के सुदूर प्रदेश गजरौला, बोकाराे, रांची, मध्यप्रदेश, हैदराबाद, आंध्रप्रदेश, तेलगांना व चंदौली वाराणसी से साधु संत गया आएगें। उन्होंने कहा कि सुखी जीवन जीने के लिए एक गुरू का होना जरूरी है। गुरू कृपा से ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव है।
शहर के बाइपास स्थित हनुमान मंदिर में गुरू पूर्णिमा पर मंत्रालय रामाचार्य वैदिक पाठशाला द्वारा गुरु पूजन उत्सव, गुरु दीक्षा संस्कार, सभी देवताओं का पूजन, विश्व कल्याण के लिए हवन व नूतन बाल ब्रह्मचारियों का यज्ञोपवित्र संस्कार धारण का कार्यक्रम होगा, साथ ही प्रसाद भी बांटे जाएगें। इसकी जानकारी वैदिक पाठशाला के आचार्य राजा आचार्य ने दी। उन्होंने बताया कि गुरू पूर्णिमा से जुड़ी सारी तैयारी पूरी कर ली गई है।

