मधेपुरा : हिंदू धर्म का पवित्र मास सावन आज से शुरू हो चुका है । सावन में बाबा भोले के पूजा का विशेष महत्व है। मधेपुरा जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर सिंघेश्वर धाम में सावन के आने पर श्रद्धालुओं की भीड़ शुरू हो चुकी है। ऐसी मान्यता है कि आज से 4 महीने के लिए बाबा भोले के ही हाथों सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी होगी। हिंदू धर्म में चातुर्मास या चौमासा का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास की शुरुआत हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से होती है जो कि कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक होती है। चातुर्मास की शुरुआत रविवार 10 जुलाई 2022 से हो गई है। ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु पूरे 4 महीने के लिए सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में सौंपकर योग निद्रा में चले जाते हैं ।

ये चार महीने सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक के होते हैं। इन महीनों में चार देवी-देवताओं की विशेष कृपा मिलती है। कहा जाता है कि इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और तिलक जैसे कई कार्यों पर पाबंदी लग जाती है। इन शुभ कार्यों के लिए इस समय पंचांग में कोई शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं। इसके अलावा भी चातुर्मास के दौरान कई तरह के कार्यों को करना वर्जित माना जाता है।

आइए जानते हैं कि चातुर्मास में आने वाले महीनों का धार्मिक रूप से क्या महत्व होता है। चातुर्मास का पहला महीना सावन होता है और इस महीने में देवाधिदेव महादेव की कृपा रहती है। कहते हैं कि अगर भक्त सावन के महीने में शिव जी की आराधना और उपासना सच्चे मन से करते हैं तो उनकी मनोकामना भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं। ये भगवान शिव का प्रिय महीना है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो सकती हैं । सावन का महीना 14 जुलाई से 12 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान बाबा सिंहेश्वर धाम में पूजा करने वाले श्रदालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती हैं।

सावन को लेकर सिंहेश्वर मंदिर में विशेष तैयारी की गयी है। मंदिर न्यास समिति के सचिव सह एस डी एम मधेपुरा नीरज कुमार ने बताया कि पूरे परिसर की सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। प्रयाप्त संख्या में पुलिस और मजिस्ट्रेट की तैनाती भी मंदिर और आसपास के इलाके में की गयी है।



