‘नौकरी के बदले जमीन’: जानिए क्या है पूरा केस जिसमें सीबीआई ने भोला यादव को गिरफ्तार किया

पटना: रेलवे भर्ती घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के करीबी पूर्व विधायक भोला यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है. इसी क्रम में सीबीआई ने पटना व दरभंगा के उनके 4 स्थानों पर छापेमारी की. भोला यादव की गिरफ्तारी दिल्ली से हुई है. बता दें कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब भोला यादव उनके ओएसडी थे. बताया जा रहा है कि भोला यादव को ‘जमीन के बदले नौकरी’ वाले केस में गिरफ्तार किया गया है.

सीबीआई ने 'जमीन के बदले नौकरी' केस में लालू यादव के करीबी भोला यादव को गिरफ्तार किया. (फाइल फोटो)

रेलवे भर्ती घोटाला भी वर्ष 2004 से 2009 के बीच के समय का है. आरोपों के अनुसार, लालू यादव जब केंद्रीय रेल मंत्री थे तो जॉब लगवाने के बदले जमीन और प्लॉट लिए गए थे. इस मामले में 18 मई को सीबीआई ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यावद समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. इसी साल मई में एक साथ 17 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. आरोप यह है कि रेलवे में ग्रुप डी में नौकरी के बदले पटना में प्रमुख संपत्तियों को लालू के परिवार के सदस्यों को बेची या गिफ्ट में दी गई थी.

आरोपों के अनुसार, लालू यादव रेल मंत्री थे तो पहले अस्थायी तौर पर नियुक्ति कराते थे; और फिर जैसे ही जमीन की डील पूरी जाती, नौकरी को स्थायी कर दिया जाता था. इस तरह से सैकड़ों लोगों और अपने सगे-संबंधियों को नौकरी देने का आरोप लालू यादव पर है. इस मामले में भोला यादव पर भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. इसलिए आयकर विभाग ने छापा डाला और दूसरी ओर सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

बता दें कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में वैसे लोगों को भी नामजद किया गया है जिन्होंने लालू परिवार को जमीन देकर नौकरी पाई है. जमीन किसने और कितनी दी इसका भी जिक्र एफआईआर में किया गया है. सीबीआई ने एफआईआर में लालू परिवार के चार सदस्यों के साथ जमीन देकर नौकरी लेनेवाले 12 व्यक्तियों का भी पूरा ब्योरा दिया है. मिली जानकारी के अनुसार, ये सारी जमीन पटना में ही हैं. इनका कुल रकबा 1,05,292 वर्गफुट है. सर्किल रेट के अनुसार अभी इनकी कीमत 4,39,80,650 रुपए है.

सीबीआई के एफआईआर के अनुसार, राजकुमार, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार को नौकरी देने के नाम पर किशुन देव राय और उनकी पत्नी सोनमतिया देवी से छह फरवरी 2008 को महुआबाग की 3375 वर्गफुट जमीन राबड़ी देवी के नाम ट्रांसफर कराई गई. जमीन की कीमत 3.75 लाख दिखाई गई है. इसके एवज में तीनों को सेंट्रल रेलवे, मुबंई में नौकरी मिली.संजय राय, धर्मेद्र राय, रवींद्र राय ने अपने पिता कामेश्वर राय की महुआबाग की 3375 वर्गफुट जमीन छह फरवरी 2008 को राबड़ी देवी के नाम पर रजिस्ट्री की। इसके एवज में इन्हें सेंट्रल रेलवे, मुंबई में ग्रुप-डी में नौकरी मिली. इसी तरह किरण देवी नाम की महिला ने 28 फरवरी 2007 को बिहटा की अपनी 80905 वर्गफुट (एक एकड़ 85 डिसमिल) जमीन लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती के नाम कर दी. इस जमीन के एवज में किरण देवी को 3.70 लाख रुपए और उनके पुत्र अभिषेक कुमार को सेंट्रल रेलवे मुंबई में नौकरी दी गई.

हजारी राय ने महुआबाग की अपनी 9527 वर्गफुट जमीन 10.83 लाख रुपए लेकर मेसर्स एके इंफोसिस के नाम लिख दी. इसके बदले में हजारी राय के दो भांजे दिलचंद कुमार, प्रेमचंद कुमार में से एक को पश्चिम सेंट्रल रेलवे, जबलपुर और दूसरे को पूर्वोत्तर रेलवे कोलकाता में नौकरी दी गई सीबीआई की जांच में पाया गया कि इस कंपनी की सारी संपत्ति पूरे अधिकार के साथ वर्ष 2014 में लालू प्रसाद की बेटी और पत्नी को हस्तांतरित किए गए.

वहीं, लाल बाबू राय ने महुआबाग की अपनी 1360 वर्गफुट जमीन 23 मई 2015 को राबड़ी देवी के नाम ट्रांसफर की, जिसके एवज में लाल बाबू को 13 लाख रुपए मिले. इसके पहले ही उनके पुत्र लालचंद कुमार को 2006 में उत्तर-पश्चिम रेलवे, जयपुर में नौकरी लग गई थी. इसी प्रकार ब्रजनंदन राय ने महुआबाग की अपनी 3375 वर्गफुट जमीन 29 मार्च 2008 को गोपालगंज निवासी हृदयानंद चौधरी को 4.21 लाख लेकर ट्रांसफर की. बाद में यह जमीन हृदयानंद चौधरी ने लालू प्रसाद की बेटी हेमा यादव के नाम कर दी. जमीन जब तोहफे में दी गई उस वक्त सर्किल रेट 62.10 लाख रुपये था. हृदयानंद चौधरी को पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर में साल 2005 में ही नौकरी मिल गई थी.

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