कांवरियों के लिए जागरण, भंडारा और हेल्थ कैंप, सेवा भाव को बयां करती ये तस्वीरें

सावन का पावन महीना चल रहा है और इस खास महीने में भक्त पैदल कांवर यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. कांवरिया जिस रास्ते से बाबाधाम पहुंचते हैं उस पथ को कांवरिया पथ कहा जाता है. यह कांवरिया पथ बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से शुरू होकर देवघर तक पहुंचता है. शिव भक्त सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगाजी से जल भरकर इसी कांवरिया पथ से अपने कांवर यात्रा की शुरुआत करते हैं.

 इसके तहत सुबह में 6 बजे से हमलोग शर्बत पिलाते हैं. फिर 9 बजे प्रसाद स्वरूप पूरी बुंदिया, दोपहर 1 से 3 बजे तक चावल-दाल, सब्जी रायता, शाम में 7 बजे तक चना-हलवा और रात पूरी-सब्जी की व्यवस्था करते हैं.

इस कांवरिया पथ पर लगने वाला श्रावणी मेला पूरे एक महीने के लिए होता है. इस दौरान कांवरिया पथ सरकार और अलग संस्थाओं के द्वारा कांवरियों के लिए कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं, जिससे कि कांवरियों की यात्रा सुगम हो सके.

इसी कोशिश के साथ हर साल श्रावणी मेले के दौरान बिहार के मुंगेर जिले में कांवरिया पथ कुमरसार के पास पटना के गोलघर पार्क रोड स्थित माँ अखण्डवासिनी मंदिर की ओर से कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं. अखण्डवासिनी मंदिर परिवार की ओर से कांवरियों के लिए भंडारा, शर्बत, जागरण, स्वास्थ्य कैम्प की व्यवस्था की जाती है.

 अखण्डवासिनी मंदिर के पुजारी विशाल तिवारी के अनुसार पूरे आयोजन के लिए अखण्डवासिनी मंदिर के श्रद्धालु खासतौर पर कुमरसार जाते हैं और वहां पांच दिन रहकर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अपनी ओर से सहयोग करते हैं. इस पूरे जत्थे में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग सभी शामिल होते हैं.

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए अखण्डवासिनी मंदिर की ओर से विशाल तिवारी बताते हैं कि हम लोग पिछले 11 सालों से कुमरसार में कांवरियों के लिए शर्बत, भंडारा और स्वास्थ्य कैम्प की व्यवस्था करते रहे हैं.वहीं इस बार से हमलोगों ने श्रद्धालुओं के लिए जागरण की भी व्यवस्था की है ताकि कांवरिया पथ पर कांवर यात्रा कर रहे भक्तों को बाबा भोलेनाथ के भजन सुनकर ऊर्जा प्रदान हो सके.

विशाल तिवारी का कहना है कि उनलोगों की ओर से यहाँ शर्बत और विश्राम स्थल का इंतजाम पूरे एक महीने के लिए किया जाता है लेकिन भंडारा और जागरण की व्यवस्था पांच दिनों के लिए होती है. इस बार 20 जुलाई से हमलोगों का यह कार्यक्रम शुरू हुआ है. इसके तहत सुबह में 6 बजे से हमलोग शर्बत पिलाते हैं. फिर 9 बजे प्रसाद स्वरूप पूरी बुंदिया, दोपहर 1 से 3 बजे तक चावल-दाल, सब्जी रायता, शाम में 7 बजे तक चना-हलवा और रात पूरी-सब्जी की व्यवस्था करते हैं.

 वहीं इस बार से हमलोगों ने श्रद्धालुओं के लिए जागरण की भी व्यवस्था की है ताकि कांवरिया पथ पर कांवर यात्रा कर रहे भक्तों को बाबा भोलेनाथ के भजन सुनकर ऊर्जा प्रदान हो सके.

अखण्डवासिनी मंदिर के पुजारी विशाल तिवारी के अनुसार पूरे आयोजन के लिए अखण्डवासिनी मंदिर के श्रद्धालु खासतौर पर कुमरसार जाते हैं और वहां पांच दिन रहकर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अपनी ओर से सहयोग करते हैं. इस पूरे जत्थे में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग सभी शामिल होते हैं.

  सावन का पावन महीना चल रहा है और इस खास महीने में भक्त पैदल कांवर यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. कांवरिया जिस रास्ते से बाबाधाम पहुंचते हैं उस पथ को कांवरिया पथ कहा जाता है. यह कांवरिया पथ बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से शुरू होकर देवघर तक पहुंचता है. शिव भक्त सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगाजी से जल भरकर इसी कांवरिया पथ से अपने कांवर यात्रा की शुरुआत करते हैं.

 इस कांवरिया पथ पर लगने वाला श्रावणी मेला पूरे एक महीने के लिए होता है. इस दौरान कांवरिया पथ सरकार और अलग संस्थाओं के द्वारा कांवरियों के लिए कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं, जिससे कि कांवरियों की यात्रा सुगम हो सके.

 

 

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