नालंदा। अषाढ़ा बीता और अब सावन भी खत्म हो गया। मानसून का अतापता नहीं है। मौसम की मार ऐसी पड़ी है कि नालंदा की छोटी-बड़ी 40 नदियां सूखी पड़ी हैं। इस सीजन में एक बार भी पानी की धार नहीं बही है।
स्थिति इतनी भयावह कि जिन नदियों में लबालब पानी रहना चाहिए था। वहां मवेशी घास चर रहे हैं। हद तो यह है कि जिले की 3 प्रमुख नहरें और 10 सिंचाई परियोजनाओं में भी पानी का एक कतरा नहीं है। खरीफ की खेती संकट में पड़ गयी है।
बारिश नहीं होने के कारण भू-जलस्तर में औसतन 10 फीट तक गिरावट हो गयी है। नौबत यह कि 60 से ज्यादा गांवों का जलस्तर 40 फीट से भी नीचे चला गया है। इसकी वजह से बोरिंग और चापाकल फेल हो रहे हैं।
समरसेबल मोटर से तो खेतों की सिंचाई किसान कर ले रहे हैं। लेकिन, जिनके पास पुरानी बोरिंग हैं, वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। जलस्तर में सबसे ज्यादा गिरावट बेन, हिलसा, गिरियक, बिंद आदि प्रखंडों में हुई है।

