पटना। तीन दशक बाद गया -औरंगाबाद से जुड़ा चकरबंधा का जंगल अब नक्सलियों से मुक्त है। लडुइया पहाड़, अंजनवा की पहाड़ियों और पचरूखिया की जो गुफाएं दुर्दांत नक्सली कमांडर संदीप यादव और उसके साथियों का ठिकाना थीं, अब उन पर सीआरपीएफ के कोबरा जवानों का कब्जा है। कोबरा ने ऐसी गुफाएं ढूंढी हैं जिनमें 100 लोग रह सकते हैं। यहां छोटी-बड़ी ऐसी 50 गुफाएं हैं।

बिहार के नक्सल इतिहास में सुरक्षा बलों के चकरबंधा ऑपरेशन को सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इलाके में मुख्यरुप से सीआरपीएफ की कोबरा की 205 बटालियन और 159वीं बटालियन ऑपरेशन कर रही है। यहां बरामद एके-47 की जांच की जा रही है ताकि सप्लाई चेन का पता चल सके।
जिन गुफाओं को नक्सली शेल्टर के लिए इस्तेमाल करते थे, कोबरा को उनमें घुसने के पहले काफी जोखिम उठाना पड़ा। गुफाओं के मुहाने और उसके आसपास आईईडी लगा था। जवानों को एक-एक कर इन्हें डिफ्यूज करना पड़ा।
फिर कमांडो गुफाओं में घुसे जहां लैड माइन्स बनाने के साजो-सामान के अलावा भारी मात्रा में राशन, कपड़े, दवाई, हथियार एवं गोला बारूद भी मिले। लैड माइन्स एवं उसे बनाने के लिए इकट्ठा सामग्री को सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। जिन सामानों को ला पाना सम्भव नहीं था उसे भी नष्ट कर दिया गया।
सीआरपीएफ ने जंगल और गुफाओं से 461 सीरियल आईईडी, 165 प्रेशर आईईडी, 534 केन आईईडी, 5 सिलेंडर बम के अलावा 2 एके-47 राइफल, 1 एकेएम राइफल, 1 एसएसआर, 1 इंसास राइफल, 1 अंडरबैरल ग्रेनेड लांचर समेत तमाम हथियार मिले हैं। जांच के बाद इसकी सप्लाई लाइन का पता चलेगा।

