पर्यटन विभाग द्वारा बक्सर जिले के पंचकोसी परिक्रमा को रामायण सर्किट से जोड़ने के बाद इसके कायाकल्प बदलने के लिए खाका तैयार कर लिया गया।जिसमें बड़का नुआंव स्थित हनुमाम जी का ननिहाल भी शामिल है। यहां उद्दालक ऋषि का आश्रम था। मान्यता है कि यह स्थल मारुति नंदन हनुमानजी का ननिहाल है।
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जिनकी स्मृति में अंजनी सरोवर के साथ-साथ माता अंजनी तथा बालक हनुमान की प्रतिमाएं यहां मंदिर में स्थापित हैं। इस स्थल पर तीन करोड़ 5 लाख रुपये खर्च कर पर्यटन विभाग यात्री शेड, पेयजल, शौचालय व घाट के सौंदयकरण का कार्य कराएगा। जो बक्सर वासियों के लिए गरौव की बात है की बक्सर को रामायण सर्किट में शामिल किया गया है।

अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक रामकथा को एक सूत्र में समझाने के लिए बन रहे। रामायण सर्किट में जोड़ने के बाद पर्यटन मंत्रालय ने इसके विस्तृत प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।योजना कुल पांच चरणों मैं पूरी की जाएगी। बक्सर को योजना के दूसरे चरण में शामिल किया गया है। यहां रामलला से जुड़े धरोहरों के विकास के लिए बिहार सरकार के टूरिज्म डिपार्टमेंट ने राशि की घोषणा भी कर दी है। बक्सर के विश्व प्रसिद्ध पंचकोसी यात्रा के पांच पड़ावों पर विभिन्न सुविधाओं के विकास के लिए सरकार ने 31 करोड़ पांच लाख रुपये जारी कर दिए हैं। इन रुपयों से पांचों पड़ावों पर टूरिस्टों के लिए बेसिक सुविधाएं बहाल की जाएंगी।

पंचकोशी पांच दिवसीय पैदल यात्रा है। जिसके प्रत्येक पड़ाव पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि राक्षसी ताड़का बध के पश्चात श्रीराम गुरु विश्वामित्र के साथ सभी ऋषियों का आशीर्वाद लेने निकले थे। इसी क्रम में विश्वामित्र आश्रम के आसपास पांच कोस के क्षेत्र विभिन्न ऋषियों के आश्रम पर जाकर उन्होंने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था।

ताड़का वध के पश्चात राम ने इन पड़ावों पर रात्रि विश्राम किया था।पंचकोसी का चौथा पड़ाव है। हनुमान जी का ननीहाल था।जहाँ उस समय उद्दालक ऋषि का आश्रम हुआ करता था।जहाँ अपने हाथों से खिचड़ी बना कर भोग लगाया था।जहाँ यह परंपरा आज भी जारी है।चौथा पड़ाव में रुक लोग यहाँ खिचड़ी बनाकर खाते है।भव्य मेले का आयोजन होता है।


