मुजफ्फरपुर। जयपुर में नीट पीजी काउंसलिंग में फर्जीवाड़ा कर सीट ब्लॉक करनेवाले चौथे आरोपित एसकेएमसीएच के जूनियर डॉक्टर की हाजिरी एसकेएमसीएच में उस दिन भी बनी हुई है जिस दिन उसकी गिरफ्तारी हुई थी। इसका खुलासा तब हुआ जब वहां की पुलिस ने एसकेएमसी प्राचार्य डॉ. विकास कुमार से संपर्क किया।
फिर हाजिरी पंजी मंगाई गई ताे प्राचार्य स्वयं हतप्रभ रह गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हाेंने अधीक्षक स्तर से मेडिसिन विभागाध्यक्ष से पूरी रिपोर्ट मांगी है। उधर, इस मामले काे लेकर कॉलेज से लेकर अस्पताल परिसर तक हड़कंप मच गया है
मेडिसिन विभागाध्यक्ष सवालों के घेरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि पुलिस उनका बयान दर्ज करने एसकेएमसीएच पहुंच सकती है। हालांकि, अधीक्षक डॉ. बाबूसाहेब झा ने बताया कि जूनियर डॉक्टर मो. सरफराज का टेन्योर समाप्त हो चुका है। पुलिस जो साक्ष्य मांगेगी वह उपलब्ध कराए जाएंगे।
विभागाध्यक्ष स्तर से उपस्थिति पंजी की रिपोर्ट भेजी जाती है, उसी आधार पर वेतन भुगतान किया जाता है। बता दें कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में नीट पीजी काउंसलिंग में फर्जीवाड़ा कर सीट को ब्लॉक करने के बड़े मामले का खुलासा 3 मई को हुआ था।
मामले में पुलिस ने एसकेएमसीएच के जूनियर डॉक्टर मो. सरफराज आलम समेत बिहार के रहने वाले मोहम्मद शहबाज, आदित्य रोशन और अमित कुमार को नामजद किया। चारों ने राजस्थान के जयपुर और उदयपुर में निजी मेडिकल कॉलेजों से पीजी करने के लिए आवेदन किया था।
उधर, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अकील अहमद मुमताज ने बताया कि पंजी की जांच होने पर बनाई गई हाजिरी को काट दिया गया है। किसी अन्य द्वारा हाजिरी बना दी गई हाेगी। हाजिरी बनाए जाने के बाद उतना गौर नहीं किया जाता है।
