पटना: बिहार के कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह न्यायालय की नजर में फिलहाल फरार नहीं है. कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर 1 सितंबर तक रोक लगा दी है. दरअसल यह खबर आई थी कि कार्तिकेय सिंह अपहरण के एक मामले में फरार चल रहे हैं और कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है. साल 2014 में बिहटा थाना क्षेत्र के में बिल्डर राजू सिंह के अपहरण मामले में विधायक अनंत सिंह के अलावा कार्तिकेय सिंह भी आरोपी बनाए गए थे.

मंगलवार को बिहार के कानून मंत्री बने कार्तिकेय सिंह ने इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका 201/22 दाखिल की थी. कोर्ट ने इस केस में 12 अगस्त 2022 को अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर अगली तिथि 1 सितंबर 2022 तक रोक लगा रखी है, यानी बिहार के कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह उर्फ कार्तिकेय मास्टर फिलहाल फरार नहीं हैं. कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह ने भी इस मामले में सफाई दी है.

राजद के एमएलसी ने कहा कि मुझे वारंट जारी करने से संबंधित कोई जानकारी नहीं है. कार्तिकेय सिंह और उनके समर्थकों का कहना है कि मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा एक साजिश के तहत दुष्प्रचार में लगी हुई है और कार्तिकेय सिंह की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है. इस मामले में राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने भी मीडिया के सामने आकर बयान दिया और कहा कि कार्तिकेय सिंह फिलहाल इस मामले में फरार चल रहे हैं. सुशील मोदी के बयान के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई और कई नेता बयान बाजी की राजनीति में कूद पड़े.

सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार भी शुरू हो गई. एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पूरे मामले से खुद को अनजान बताया वहीं राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह ने कहा कि इस तरह का मामला संज्ञान में आने के बाद अगर कोर्ट इस मामले में उन्हें दोषी साबित करता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
बहरहाल इस मामले ने एक बार फिर से बिहार की राजनीति को गरमा दिया है. इस पूरे मामले में कार्तिकेय सिंह और उनके समर्थकों की तरफ से उनके अधिवक्ता संवाददाता सम्मेलन कर अपना पक्ष रखेंगे.



