भागलपुर में गंगा अपना रौ’द्र रूप दिखाने लगी है। जिले में बाढ़ वाले हालात हैं। बाढ़ की शुरुआती चपेट में शहर से सटे तीन गांव शंकरपुर, बिंद टोला, दिलदारपुर बिंद टोला, रत्तिपुर आ गए हैं। अब इस गांव के लोगों की जिंदगी नाव से मौ’त के ख’तरों से खे’लते हुए गुजर रही है। नाव के सहारे अपने डू’बे हुए घर से सामान को सु’रक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हैं। नाव ही इनका एक आखिरी सहारा बना है।
भागलपुर का प्रसिद्ध बूढ़ानाथ मंदिर, जिसके परिसर में बाढ़ के पानी ने दस्तक दी। स्थिति को जानने की शुरुआत वहीं से की गई। मंदिर से 500 मीटर पश्चिम की ओर बढ़ने पर नदी से सटे तीन गांव संकरपुर बिंद टोला, दिलदार पुर बिंद टोला, रत्तिपुर पूरी तरह डूब गए हैं।
इन तीनों गांवों में बच्चे-बूढ़े समेत करीब 15 हजार लोग रहते हैं। वे लोग वहां से सबसे पहले अपने मवेशियों को निकालने में लगे हैं। पशुओं को शहर के ऊपरी इलाकों में पहुंचाया जा रहा है। लोगों के घरों में करीब 3 से 4 से फीट गहरे पानी में समा गए हैं।
शंकरपुर बिंद टोले में एक माध्यमिक विद्यालय है। इसे नीचले तल के बरामदे तक पानी घुस चुका है। इस स्कूल में आसपास के इलाकों के करीब 300 बच्चे पढ़ाई करते हैं। बाढ़ के कारण स्कूल बंद है।
ना तो इस स्कूल में बच्चों के आने के रास्ते बचे है। ना इस स्कूल में बच्चो के पढ़ने के लिए जगह। स्कूल के जिस कैंपस में बच्चे खेला करते थे। वहीं अब नहा रहे हैं।
