पटना. शराबबंदी वाले राज्य बिहार में बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) को शराब पीने का दोषी पाया गया है. पटना पुलिस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, एमएलसी और प्रदेश बीजेपी के महासचिव कुमार को सड़क दुर्घटना के एक मामले की तहकीकात के सिलसिले में एक अन्य शख्स के साथ बीते सात जुलाई को पाटलिपुत्र थाना लाया गया था.

कुमार ने ‘ब्रेथ एनेलाइजर’ (Breath Analyzer) जांच कराने से मना कर दिया था जो यह पता लगाने के लिए की जाती है कि व्यक्ति ने शराब पी रखी है या नहीं. उसमें बताया गया है कि इसके बाद उनकी खून की जांच करायी गयी जिसमें उनके शराब पीने की पुष्टि हुई.

पुलिस ने बताया कि इस मामले में कुमार ने सोमवार को पटना में विशेष अदालत (उत्पाद) में आत्मसमर्पण कर दिया था जिसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस मामले में उनके विरूद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर कर दिया गया है.

इस बीच बीजेपी के एमएलसी ने पत्रकारों से कहा कि मैंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया है, और निश्चित रूप से घटना के दिन मैं नशे में नहीं था. उनके खिलाफ आई जांच रिपोर्ट राजनीति से प्रेरित है.

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की घोषणा की थी. इसके तहत राज्य भर में शराब के उत्पादन, बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लग गया है. इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान लागू किया गया था. हालांकि बाद में कानून में संशोधन कर जुर्माना राशि को कम कर दिया गया था. नया कानून लागू होने के बाद अब शराब पीते हुए पकड़े जाने पर आरोपी को जुर्माना राशि देकर छोड़ा जा सकता है. जबकि पहले शराब पीकर पकड़े जाने पर सीधे जेल भेज दिया जाता था.

