पटना। बिहार में सत्ता का बदलाव जरूर हो गया हो, लेकिन एक महीना होते-होते उसकी परतें भी साफ दिखने लगी हैं। महागठबंधन के साथ रिश्ता जोड़ने के बाद नीतीश कुमार के भाव दर्शा रहे थे कि वे अपना किला न सिर्फ बचा सके हैं, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत कर लिया है। महागठबंधन के उनके साझेदार भी पूरी शिद्दत से नीतीश कुमार का इस्तकबाल कर रहे थे।
लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सत्ता से बाहर होकर हारी भाजपा वापसी करने लगी है। BJP अपनी रणनीति को सफल मान रही है। साथ ही महागठबंधन की गांठें खुलने के भी संकेत मिल रहे हैं। कार्तिक सिंह के विभाग बदलने से एक महीने के अंदर महागठबंधन की पकड़ ढीली तो हो ही गई है।
कार्तिक सिंह के विभाग बदलाव को RJD भले सहजता से ले रही हो लेकिन, यह मामूली बात नहीं है। फैसले का बचाव करते हुए RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि यह सीएम का विशेषाधिकार है।
दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने साथी दलों के साथ विचार-विमर्श कर यह फैसला बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए किया है।
लेकिन सभी जानते हैं कि भाजपा, कार्तिक कुमार को लेकर पहले दिन से हमलावर है। 16 अगस्त को कार्तिक ने शपथ ली और उसी दिन से उनकी कुंडली लेकर भाजपा नेता मीडिया के सामने बैठ गए। ऐसे में भाजपा कह रही है कि उसके दबाव में नीतीश सरकार ने यह फैसला लिया है।



