कैमूर :बिहार में महागठबंधन सरकार लगातार विवादों में है. खास तौर पर कई मंत्रियों के गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्तता के कारण कई सवाल उठते रहे हैं. अब बिहार बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह सुर्खियों में हैं. दरअसल, कृषि मंत्री ने अपनी ही महागठबंधन की सरकार पर तीखा तंज कसा है. उन्होंने एक कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों पर व्यंग्यात्मक लहजे में कटाक्ष किया और कहा कि हमारे विभाग में कई लोग चोर हैं, ऐसे में हम उन चोरों के सरदार हुए. मंत्री ने यह भी कहा कि हमारे ऊपर भी कई सरदार हैं.

बता दें कि कैमूर के चांद प्रखंड में कृषि मंत्री सुधाकर सिंह अभिनंदन समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे. कृषि मंत्री ने कहा, कृषि विभाग में कोई सेक्शन नहीं है जो चोरी नहीं करता. ऐसे में हम चोरों के सरदार ही न कहलाएंगे. सुधाकर सिंह ने तंज भरे लहजे में कहा कि किसान लोग पुतला ये सब फूंकते रहेंगे, तो मुझे भी याद रहेगा कि किसान नाराज हैं हमसे. नहीं फूंकिएगा तो हमको लगेगा कि सब ठीक है. सुधाकर सिंह कहा कि लोहिया जी ने ठीक कहा था कि जब ससंद आवारा हो जाए तो जनता को सड़कों पर उतरना चाहिए.

कृषि मंत्री ने आगे यह भी कहा कि हमारे ऊपर भी लोग हैं. उनके सामने मैं अगर बात रखता हूं तो उन लोगों को लगता है मैं अपनी बात कर रहा हूं. जब मैं कैबिनेट में बोलता हूं तो लगाता है कि यह मेरी निजी समस्या है. लेकिन, आप सबलोग जब मिलकर बोलिएगा तब जाकर कान में तेल डालकर बैठे लोगों तक आवाज पहुंचेगी. सुधाकर सिंह ने कहा कि सरकार तो बदल गई है, लेकिन है ये वही पुरानी वाली सरकार. चाल चलन भी पुरानी सरकार जैसी ही है. अफसरों को लगता है राजद वाले घेरेंगे तो उधर दूसरे दल के साथ मिल जाएंगे.

सुधाकर सिंह ने कहा, लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है, और जिन अधिकारियों को भ्रम है कि हम लोग कानून तोड़कर बच जाएंगे, मुझे विश्वास है कि वह बच नहीं पाएंगे. बचने के लिए जितनी ताकत लगानी है लगा लें फिर भी वह बचेंगे नहीं. जब मैं सरकार में नहीं था तभी आप लोगों एवं किसानों की समस्याओं को लेकर सड़क से लेकर सदन तक बोला करता था, आज मैं सरकार में हूं तब भी चुप नहीं बैठूंगा. किसानों एवं आम लोगों की समस्याओं से उसे लेकर बोलता ही रहूंगा चाहे इसके लिए मुझे अपनी कुर्सी क्यों नहीं गंवानी पड़े.
उन्होने आगे कहा, कृषि विभाग के अधिकारियों की स्थिति यह है कि जमीन के बजाय आंकड़े की खेती कागज पर करते हैं. आंकड़ों में बताया गया है कि 87 फीसदी रोपनी हो गई और बारिश महज 40 प्रतिशत कम हुई है, जो की पूरी तरह से फर्जी है. अधिकारी इस कदर भ्रष्ट हैं कि सरकार के सामने रोज गलत आंकड़े पेश करते हैं. खाद की बिक्री से लेकर धान खरीद, माप तोल का लाइसेंस देने सहित दाखिल खारिज तक में घूस लिया जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा, हम लगातार प्रयासरत हैं कि कम से कम हम अपने विभाग में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएं और इसका असर भी आपको आने वाले दिनों में दिखेगा. फिलहाल मैं दो कानूनों को बदलवाने पर लगा हुआ हूं. पहला धान खरीदी के नियम में बदलाव किया जाए .टैक्स के अलावा अन्य एजेंसियों से भी धान की खरीदी की जाए, वहीं मंडी की व्यवस्था पहले की तरह फिर से लागू की जाए.

