बदलते मौसम में बीमारियां हैं आम, आयुर्वेद के इन उपायों से आपको नहीं पड़ेगी अस्‍पताल जाने की जरूरत

पटना।वर्षा ऋतु मच्छर व कीट जनित, पाचन संबंधी समस्याओं के अलावा वात दोष बढऩे से जुकाम-खांसी, वायरल बुखार, कंजेक्टवाइटिस और आर्थराइटिस जैसे रोगों का शिकंजा कसने लगता है। आयुर्वेदिक खान-पान नियमों का पालन कर काफी हद तक इन रोगों से बचाव संभव है वह भी बिना अतिरिक्त खर्च के। हमने इस संबंध में पटना स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कालेज के उपाधीक्षक डा. धनंजय शर्मा से इस बारे में बात कर ये खास रिपोर्ट तैयार की।

स्‍वस्‍थ रहने के लिए अपनाएं आयुर्वेद के ये आसान उपाय। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

डा. शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक नुस्खों से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और इससे वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, टायफाइड, पेट दर्द, कब्ज, डायरिया आदि की आशंका कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि हर दिन अजवायन का पानी पीने और सौंफ चबाने से पाचन संबंधी कई रोगों से बचा जा सकता है। वहीं तुलसी-अदरक का सेवन खांसी, जुकाम से लेकर वायरल बुखार कम करने तक में उपयोगी है।

डा. धनंजय ने बताया कि वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, ऐसे में घर में बना कम मसाले वाला ताजा-गर्म भोजन करना चाहिए। इसके अलावा एक लीटर पानी में एक चम्मच अजवायन उबालकर सुबह-शाम एक गिलास पीने से न सिर्फ पाचन शक्ति दुरुस्त रहती है बल्कि मौसम में होने वाले ठंड-गर्म के दुष्प्रभाव से भी सुरक्षा मिलती है।

इसके अलावा खाने के बाद सौंप चबाना भी हितकारी होता है। इसके अलावा हरी साग-सब्जयों का सेवन अच्छे तरीके से धोने के बाद ही करें और खट्टे फलों के बजाय मौसमी फलों जैसे जामुन, नासपाती, सेब, केला, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करें। रात में दही के सेवन से बचें।
चाय व दूध के साथ तुलसी, अदरक व काली मिर्च का सेवन करने से वात दोष नहीं उभरते।  सुबह-शाम आधा-आधा छोटा चम्मच हल्दी पानी या दूध के साथ लेने से इम्युन पावर बढ़ती है। सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियां ताजे पानी के साथ लेने से कोलेस्ट्राल नियंत्रित रहता है। एक चम्मच गिलोय पाउडर या चार-पांच इंच लंबी डंडी, 2 काली मिर्च, तुलसी के 10 पत्ते को उबाल कर ऐसे ही या गुड़ और नींबू मिलाकर पीने से बुखार का खतरा कम हो जाता है।
बुखार हो जाने पर महा सुदर्शन चूर्ण या महा सुदर्शन घनवटी का सेवन करें, बुखार उतर जाएगा।  दूध, घी, शहद, जौ, गेंहू व साठी चावल के साथ खाने में सोंठ, नींबू व हरी मिर्च का सेवन करें, मांस-मछली का सेवन नहीं करें।  नमी अधिक होने के कारण खुले आसमान के नीचे सोने से बचें, इसी प्रकार एसी में सोएं तो चादर ओढ़कर सोएं। वर्षा ऋतु में मच्छर व कीट पतंगों के कारण कई रोग होते हैं। इनसे बचाव के लिए घर को साफ रखें और कहीं भी पानी नहीं जमा होने दें। कीट और मच्छरों से बचाव के लिए कीटनाशक दवा का छिड़काव करें। घर में नमी नहीं रहने दें और दिन में घर की खिड़कियां खोल कर रखें। बागवानी करते समय दस्ताने व पूरी बांह के कपड़े अवश्य पहनें।

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