हाथी पर सावर होकर आ रहीं मां दुर्गा, इसका क्‍या है संकेत, समझ‍िए…

जमुई : शारदीय नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। यह अतिवृष्टि का सूचक है। जानकारी देते हुए पंडित मनोहर आचार्य ने कहा कि मां दुर्गा की वापसी मनुष्य के कंधे पर होगी और यह सुख समृद्धि का कारक है।

उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर को कलश स्थापन के साथ नवरात्र प्रारंभ हो जाएगा और इस बार लोगों को नौ दिनों तक उपवास करना होगा। पांच अक्टूबर विजयादशमी के दिन नवरात्र का समापन होगा।

26 सितंबर को माता के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री ,27 को ब्रह्मचारिणी, 28 को चंद्रघंटा, 29 को कुष्मांडा, 30 को स्कंदमाता और एक अक्टूबर को माता के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा की जाएगी।

दो अक्टूबर को महासप्तमी होगी और इस दिन माता के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाएगी। इस दिन बेलभरनी पूजन भी होगत। तीन अक्टूबर को माता के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाएगी।

इस दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा मां दुर्गा को खोइछा दिया जाएगा और कई लोगों द्वारा विशेष पूजा अर्चना कर सिद्धि भी प्राप्त की जाती है।

वहीं बहुत सारे जगहों पर चार अक्टूबर महानवमी के दिन माता के नवम स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना के पश्चात बकरा की बलि होगी। पांच अक्टूबर को विजयादशमी होगी और इस दिन मां दुर्गा का विसर्जन किया जाएगा।

इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा कुमारी कन्याओं को भोजन कराकर दान दक्षिणा भी दिया जाता है। मां दुर्गा की पूजा से पूर्ण फल और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है तथा सौभाग्य,आरोग्य और सुख समृद्धि में भी वृद्धि होती है।

जिले में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू कर दी है। मंदिरों का सजाया जा रहा है। मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण हो रहा है। जगह जगह पंडाल बनाए जा रहे हैं। दुर्गा पूजा के आयोजन के लिए समितियों का गठन किया गया है।

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