माता की आराधना के लिए ली समाधि, मतलब जमीन के अंदर ही चले गए

पश्चिम चंपारण। यह प्रसंग बिहार के पश्चिम चंपारण से जुड़ा है। बैरिया थाना क्षेत्र की सिसवा सरैया पंचायत के सरैया घाट शिवमंदिर परिसर में सोमवार की शाम में पूर्वी चंपारण के घोड़ासन झंडवा रामजानकी मठ के बाबा ने नवरात्र के नौ दिवसीय व्रत और अनुष्ठान के लिए समाधि ले ली।

jagranवे नवरात्र के बाद दशमी तिथि को समाधि से बाहर आएंगे। हालांकि मंगलवार की सुबह में मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंचे श्रद्धालु भक्तों को बाबा ने समाधि से हाथ बाहर निकालकर आशीर्वाद दिया और बात भी की। समाधि लिए बाबा त्यागी सीताराम दास(54) पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन के बिजबनी बरईटोला के निवासी हैं।

समाधि लिए बाबा के शिष्य अयोध्या के बजरंगी दास ने बताया कि बाबा पिछले 37 वर्ष से हर वर्ष नवरात्र में समाधि लेकर माता की आराधना करते हैं। दस दिनों में वे फलहार समेत जल त्याग भी करते हैं। समाधि के दिनों में वे मां दुर्गा की आराधना करते हैं।

मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि दो माह पहले बाबा त्यागी सीताराम दास यहां आए और मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे। नवरात्र आरंभ होने के पूर्व बाबा ने बताया कि वे समाधि लेकर माता की साधना करते हैं।

इसको लेकर ग्रामीणों के सहयोग से समाधि के लिए 12 फीट लंबा, चौड़ा और गहरा समाधि की खुदाई कराई गई है। जिसमें बाबा के विश्राम के लिए एक चौकी भी रखी गई है। पूजन सामग्री के अलावा कुछ भी नहीं है।

समाधि में बाबा के प्रवेश करने के बाद दो फीट के आसपास हवा और धूप के लिए जगह छोड़ी गई है। जिस पर मच्छरदानी लगाया गया है। शेष समाधि को बांस की चचरी रखकर पूरी तरह से मिट्टी से भर दिया गया है। छोड़े गए जगह से हीं प्रतिदिन सुबह में बाबा हाथ बाहर निकालकर श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वाद देंगे।

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