नवादा SP ने 5 पुलिसवालों को हाजत में रखा था बंद, अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

नवादा: बिहार के नवादा में 2 घंटे के लिए 5 पुलिसवालों को हाजत में बंद करने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है. आयोग ने बिहार सरकार से 21 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है. दरअसल नवादा पुलिस अधीक्षक गौरव मंगला के द्वारा 8 सितंबर को करीब 10:00 बजे कांडों की समीक्षा के बाद पांच पुलिसकर्मियों को थाना हाजत में लगभग दो घंटे बंद कर दिया गया था. जिस पर बिहार पुलिस एसोसिएशन ने भी सवाल उठाया था. वहीं, इस मामले में एसपी के खिलाफ FIR का आदेश जारी किया जा चुका है.

Thumbnail imageनवादा में एसपी ने दारोगा के थाने में किया बंद

मामला 8 सितंबर की रात का है, जब एसपी गौरव मंगला ड्यूटी के दौरान निरीक्षण करते हुए नवादा नगर थाना गए थे. थाना पहुंचने के बाद उन्होंने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और दारोगा स्टेशन डायरी मांगी. मौके पर डायरी अपडेट नहीं होने की वजह से वो गुस्से में आ गए और थाने में मौजूद एसआई शत्रुघ्न पासवान, एसआई रामपरेखा सिंह, एएसआई संतोष पासवान, एएसआई संजय सिंह और रामेश्वर उरांव की जमकर क्लास लगाई, वहीं उन्हें लगभग दो घंटे के लिए लॉकअप में बंद कर दिया. दूसरी ओर इस कार्रवाई को देखते हुए पुलिसकर्मी भी कुछ नाराज नजर आ रहे हैं.

एसपी की कार्रवाई पर पुलिस एसोसिएशन की नाराजगी

पुलिसकर्मियों को दंडित करने के लिए पुलिस नियम में सजा का प्रावधान है. पुलिस अधीक्षक नवादा द्वारा नगर थाना के पीड़ित पुलिस पदाधिकारियों पर मामले को दबाने का दबाव बनाया जा रहा है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत सभी थानों में सीसीटीवी कैमरा लगे हैं. उस कैमरे के अवलोकन से सारी घटना सामने आ जाएगी. मृयुंजय सिंह ने एसपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ करवाए जाने का संदेह जताया है.

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने जताई नाराजगी

मृत्युंजय सिंह कहते हैं कि बिहार पुलिस एसोसिएशन सरकार और पुलिस मुख्यालय से मांग की है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए. थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज की विधिवत जांच कराकर सत्य को सामने लाया जाए और साक्ष्य मिलने पर पुलिस अधीक्षक नवादा पर आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज कराकर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए. इस तरह की घटना पुलिस इतिहास में बिहार की पहली घटना होगी. इस घटना से बिहार पुलिस की छवि जनमानस में काफी धूमिल हुई है. इस घटना से बिहार के तमाम पुलिस मर्माहत एवं आक्रोशित हैं। इस तरह की घटना अंग्रेजी शासनकाल की याद दिला दी. मृत्युंजय सिंह कहते हैं कि जब उन्होंने इस घटना के संबंध में जानकारी के लिए पुलिस अधीक्षक नवादा को फोन लगाया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया.

 

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