गया : इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 यानी आज लगने जा रहा है. 25 अक्टूबर को पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में काफी उथल पुथल मचाएगा. गया क्षेत्र के पंडित राजा आचार्या बताते हैं कि ग्रहण का खगोल शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र दोनों में महत्व होता है. धार्मिक नजरिए से देखें तो सूर्य या चंद्रमा को राहु-केतु (जो कि यह एक छाया ग्रह हैं) की छाया में आने पर ग्रहण लग जाता है. बात गया की करें तो यहां दोपहर 4:45 मिनट से शाम 5:15 मिनट तक सूर्य ग्रहण रहेगा.

27 साल बाद बना है ऐसा संयोग
यह सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक रूप से देखाई देगा. इसका प्रारंभ 25 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर शाम 06 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. यह सूर्य ग्रहण 04 घंटे 3 मिनट तक रहेगी. ऐसी ही स्थिति 27 साल पूर्व 1995 में बनी थी, जब दिवाली के अवसर पर ही सूर्य ग्रहण लगा था.
यह लोग न देखें सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में लग रहा है. इस वजह से स्वाति नक्षत्र में जन्मे लोगों को इस सूर्य ग्रहण को नहीं देखना चाहिए. अमावस्या तिथि में ही आंशिक सूर्य ग्रहण होता है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण भी कहते हैं. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, ऐसे ग्रहण में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी अधिक हो जाती है. सूर्य का प्रकाश धरती तक पहुंचने से पूर्व चन्द्रमा बीच में आ जाता है. इस कारण से सूर्य का कुछ भाग ही दिखाई देता है.

सूतक प्रारम्भ – 03:29 am
सूतक समाप्त – 06:32 pm
ग्रहण काल के दौरान बरतने वाली सावधानियां
मान्यता है ग्रहण के दौरान खाना पीना नहीं चाहिए और न ही किसी भी तरह के शुभ कार्यों का प्रारंभ नहीं करना चाहिए. सूतक काल लगते ही गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना होता है क्योंकि इस दौरान नकारात्मक शक्तियां काफी प्रबल रहती हैं. जिसका बुरा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है. ग्रहण काल के बाद स्नान कर लेना चाहिए. सूतक लगते ही खाने पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए. इस अवधि में चाकू, छुरी या तेज धार वाली वस्तुओं का प्रयोग न करें. ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिये महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
क्या होता है सूतक ?
सूर्य ग्रहण से पहले सूतक शुरू हो जाता है. जिस दौरान सभी शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है. मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं. इस दिन संपूर्ण दिवस एवं रात्रि मंदिर बंद रहने चाहिए, अगले दिन प्रात सूर्योदय के बाद पूजन कर मंदिर कपाट खोलें. सूतक के समय पूजा-पाठ भी नहीं करना चाहिए. सूतक के समय भोजन भी नहीं पकाना चाहिए. क्योंकि ग्रहणों की किरणों से भोजन अशुद्ध हो सकता है. जहां तक संभव हो तो इस समय शौच जाने से भी बचना चाहिए.


