क्या जेडीयू और आरजेडी का होगा विलय, दिल्ली सम्मेलन में की जाएगी इसकी घोषणा?

पटना. बिहार की राजनीत‍ि मे एक और मोड़ आ सकता है. प्रदेश की राजनीति के एक बार फिर से करवट लेने की संभावना के पुख्‍ता संकेत मिलने लगे हैं. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के विलय के संकेत मिलने तेज हो गए हैं. माना जा रहा है कि JDU के दिल्‍ली सम्‍मेलन में बिहार की दो बड़ी राजनीतिक ताकतों के एक होने की घोषणा हो सकती है. बता दें कि कुछ महीने पहले ही नीतीश कुमार ने एनडीए का दामन छोड़ते हुए महागठबंधन में चले गए थे. अब एक बार फिर से बिहार की राजनीति का मिजाज बदलने की संभावना तेज हो गई है.

जदयू और राजद के विलय की चर्चा जोरों पर है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी/फाइल फोटो) दरअसल, बिहार को राजनीति का प्रयोगशाला यूं ही नहीं कहा जाता है. इस प्रयोगशाला में 27 साल पुरानी खिचड़ी पकाने की तैयारी चल रही है. सियासी गलियारे में चर्चा है कि आरजेडी और जेडीयू के विलय की तैयारियां चल रही हैं. पुराना जनता दल फिर आकर लेने वाला है. मसौदा लगभग तैयार है. इसकी पटकथा आरजेडी के दिल्ली सम्मेलन में ही लिखी जा चुकी थी, जब आरजेडी का नाम और सिंबल बदलने के लिए तेजस्वी यादव को अधिकृत किया गया है. अभी हाल के दिनों में तेजस्वी और नीतीश से इस संबंध में जब भी सवाल पूछा गया तो दोनों ने न ही इनकार किया और न ही इकरार किया. इससे भी इस सियासी बदलाव के अटकलों को और हवा मिल रही है. चर्चाओं का बाजार तब से और गर्म है, जबसे लालू प्रसाद यादव के सामाजिक न्याय का नारा नीतीश कुमार और ललन सिंह ने बार-बार लगाना शुरू किया.

जेडीयू और आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, विलय के बाद नई पार्टी का नाम जनता दल हो सकता है और पार्टी का सिंबल भी पुराना चक्र छाप हो सकता है. नई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार होंगे और प्रदेश की कमान तेजस्वी यादव संभालेंगे. कहा जा रहा है कि विलय का यह प्रयोग बीजेपी के काट के रूप में तैयार किया जा रहा है. नीतीश और लालू यह मानकर चल रहे हैं कि अगर दोनों का वोट बैंक और समीकरण बिहार में एक हो जाए तो बीजेपी इसका काट नहीं ढूंढ़ पाएगी.

राजनीति संभावनाओं का खेल है और नीतीश कुमार के बारे में कहावत है कि नीतिश के पेट की बात खुद नीतीश भी नहीं जानते हैं. उन्हें खुद भी नहीं पता कि उनका सियासी ऊंट कब किस करवट बैठेगा. बता दें कि लालू यादव और नीतीश कुमार एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाते थे, लेकिन बदले राजनीतिक हालात में समीकरण बदल रहे हैं.

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