दरभंगा. गुजरात के मोरबी में केबल पुल हादसे को बीते ज्यादा समय नहीं हुआ है. इसके बावजूद लोग अपनी जान के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं. दरभंगा जिले के बागमती नदी पर बरहेत्ता घाट पर 20 साल पहले बना पुल इन दिनों क्षतिग्रस्त है. विभाग ने पुल क्षतिग्रस्त होने का बड़ा सा साइन बोर्ड भी लगा दिया है, इसके बाद भी लोग अपनी जान को खतरे में डालकर पुल से न सिर्फ पैदल बल्कि बाइक से भी आवागमन कर रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि जब भी इस पुल से ट्रैक्टर गुजरता है, तो पुल हिलने लगता है. इससे यहां हर दिन दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है.
दरभंगा जिले के बरहेत्ता घाट पर बागमती नदी पर बने स्क्रू पाइल पुल का उद्घाटन 27 मई 2002 को तत्कालीन विधायक उमाधर सिंह ने किया था. महज 20 वर्षों में ही यह पुल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. आनन-फानन में पुल तो बन नहीं सकता है, इसलिए विभाग ने ‘पुल क्षतिग्रस्त’ है का बोर्ड लगाकर अपने दायित्वों की इतिश्री कर ली है. बोर्ड लगे होने के बावजूद आज भी लोग इस क्षतिग्रस्त पुल से आवागमन कर रहे हैं. स्थानीय मोहम्मद मुजीब और मनोज कुमार मंडल बताते हैं कि जब भी इस पुल पर ट्रैक्टर चलता है, तो पुल हिलने लगता है. कभी भी यहां पर बड़ी दुर्घटना घट सकती है.
25 से 30 गांव के लोगों के लिए पुल है लाइफ लाइन
बागमती नदी पर बरहेत्ता घाट में बना यह पुल हजारों लोगों के लिए लाइफ लाइन का काम करता है. स्थानीय नवीन कुमार सिंह बताते हैं कि इस पुल से रोजाना 25 से 30 गांव और 8 से 10 पंचायत के लोग गुजरते हैं. पुल की स्थिति ऐसी है कि कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है. कितने लोगों की मौत होगी यह किसी को नहीं पता. जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले इस पुल से लोग रोजाना आते-जाते हैं. अगर पुल का उपयोग नहीं करेंगे तो लोगों को लगभग 3 से 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर जिला मुख्यालय जाना होगा. वैसे इस पुल से गुजरने वाले उन तमाम 30 गांव के लोगों को कौन समझाए कि दूरी बचाने के चक्कर में वे अपनी कीमती जान को खतरे में डाल रहे हैं.




