कौन है अररिया की नाव वाली दीदी कामिनी, जिनकी गोद में गूंजती हैं किलकारियां

अररिया: सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न तरह के कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जितनी सहभागिता रहती उससे कही ज़्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने वाली नर्स मिडवाइफ (एएनएम) दीदियों की भूमिका देखी जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के तहत चलाए जा रहे कई तरह के कार्यक्रम, स्वास्थ्य से संबंधित सरकारी परियोजनाओं सहित वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण काल के दौरान संक्रमित मरीज़ों की सेवा सहित टीकाकरण में एएनएम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिकटी सीएचसी में कार्यरत एएनएम कुमारी कामिनी सिन्हा की कार्यशैली दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सीख देने वाली है। वो आज भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र औलाबाड़ी जाने के लिए नदी को पार करती है, जहां प्रतिदिन टीकाकरण के लिए जान जोखिम में डालकर लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने का काम कर रही है।

कौन है अररिया की नाव वाली दीदी कामिनी, जिनकी गोद में गूंजती हैं किलकारियां,  स्वस्थ रहती हैं गर्भवती महिला - Who is boat sister Kamini of Araria, in  whose lap the kilkariसिकटी सीएचसी में कार्यरत 42 वर्षीय एएनएम कुमारी कामिनी सिन्हा ने बताया कि लगातार क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में भ्रमण कर वह स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित तमाम योजना एवं कार्यक्रम में पूरी तन्मयता के साथ कार्य करती आ रही हैं। वह कहती हैं कि स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी कार्यक्रम की सफ़लता के पीछे हम जैसी एएनएम की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में सबसे निचले स्तर पर हमलोगों की जवाबदेही बढ़ जाती है। वो सितंबर 2020 से सिकटी में सेवा दे रही है।

जिंदगी को दांव पर लगाकर कर रहीं ड्यूटी

सिकटी सीएचसी अंतर्गत खोरागाछ पंचायत स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र औलाबारी में कार्यरत एएनएम कुमारी कामिनी सिन्हा बताती है कि लगभग पांच हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवा देने का काम कर रही है। औलाबारी एक टापू की तरह है जिसके तीन तरफ पानी से घिरा है। इन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 157, 112, 111, 61 एवं 59 के नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित देखभाल करने के लिए नूना नदी पार कर जाना पड़ता है। हालांकि क़भी-कभी नाव नहीं मिलने के कारण जान जोखिम में डाल कर जुगाड़ टेक्नोलॉजी के तहत बनाए गए नाव के सहारे नियमित टीकाकरण या कोविड-19 टीकाकरण के लिए जाना पड़ता है। अपनी जिंदगी को दाव पर लगाकर, वह उनलोगों की सेवा करती हैं।

नाव वाली दीदी के नाम से है पहचान

वह कहती हैं कि ज्यादातर उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ता है। आवागमन का दूसरा कोई विकल्प नहीं है। नाव नहीं मिलने की स्तिथि में पानी में उतरना पड़ता है। जान का भय हमेशा बना रहता है। नाव पर चढ़ते समय भगवान के सामने नतमस्तक हो कर विनती करती हूं कि अब मेरी जिंदगी आपके हवाले है। क्योंकि मेरे साथ कई नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं के साथ ही हजारों ग्रामीणों की सेवा करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौंपी गई है। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग नाव वाली दीदी के नाम से पुकारते हैं। कुमारी कामिनी सिन्हा बताती हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकटी के द्वारा कोविड-19 टीकाकरण में बेहतर कार्य के लिए तत्कालीन सीएचसी प्रभारी राजीव कुमार बसाक तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश कुमार ठाकुर द्वारा सम्मानित किया गया है।

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